शीतल मीणा मौत प्रकरण: परिजनों ने लगाया कार्यस्थल पर प्रताड़ना का आरोप, जांच में जुटी पुलिस
दौसा जिले के सिकराय में कनिष्ठ लेखाकार शीतल मीणा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार गहराता जा रहा है। परिजनों ने उपकोष अधिकारी और कुछ कर्मचारियों पर मानसिक दबाव और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं खाद्य सुरक्षा विभाग ने मामले से जुड़े खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए भेज दिए हैं। पुलिस कॉल डिटेल, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने लिए सैंपल, रिपोर्ट का इंतजार
शीतल मीणा की मौत के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच तेज कर दी गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने उपकोष कार्यालय और पुरानी तहसील क्षेत्र के आसपास से बादाम शेक और कुल्फी के नमूने एकत्र किए हैं। अधिकारियों के अनुसार इन नमूनों को प्रयोगशाला भेजा गया है, जहां उनकी गुणवत्ता और संभावित संदिग्ध तत्वों की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में किसी खाद्य पदार्थ की भूमिका रही या नहीं। फिलहाल प्रशासन हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ा रहा है।
परिजनों ने उपकोष अधिकारी पर लगाए गंभीर आरोप
मृतका के परिजनों ने जिला अधिकारियों के सामने आरोप लगाया कि शीतल मीणा पर लगातार कार्य का दबाव बनाया जाता था। उनका कहना है कि छुट्टियों के दिनों में भी उसे कार्यालय बुलाया जाता था और मानसिक रूप से परेशान किया जाता था। परिजनों के इन आरोपों के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, कार्यालयी दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि शीतल किन परिस्थितियों में काम कर रही थी और क्या उस पर किसी प्रकार का दबाव था।
अचानक बिगड़ी तबीयत, उपचार के दौरान हुई मौत
जनवरी 2025 में नौकरी पाने वाली शीतल मीणा सिकराय उपकोष कार्यालय में कनिष्ठ लेखाकार के पद पर कार्यरत थीं। 10 जून को कार्यालय में ड्यूटी के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। पहले उन्हें स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर कर दिया गया। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और परिजन मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
पुलिस को दी गई शिकायत में विषैले पदार्थ की आशंका
शीतल के भाई मोहनलाल मीणा ने पुलिस में दर्ज कराई रिपोर्ट में उपकोष अधिकारी मनोज मीणा और कुछ कर्मचारियों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। शिकायत में यह भी आशंका जताई गई है कि किसी पेय पदार्थ में विषैला तत्व मिलाया गया हो सकता है। पुलिस ने मामला दर्ज कर विभिन्न पहलुओं पर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी और सभी साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जा रहा है।
प्रारंभिक जांच में विषाक्तता की पुष्टि
पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच में शीतल की मौत विषाक्तता के कारण होने की पुष्टि हुई है। हालांकि यह विषाक्त पदार्थ शरीर में कैसे पहुंचा, इसकी जांच अभी जारी है। अस्पताल में उपचार के दौरान हुई उल्टियों और चिकित्सकीय निरीक्षण के आधार पर डॉक्टरों ने जहरीले पदार्थ की आशंका जताई थी। पोस्टमार्टम और अन्य मेडिकल रिपोर्टों के आधार पर आगे की जांच की जा रही है। अंतिम निष्कर्ष फॉरेंसिक और प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।
टूटा मोबाइल और कार्यालय में खड़ी स्कूटी बनी जांच का हिस्सा
घटना वाले दिन शीतल का टूटा हुआ मोबाइल कार्यालय की टेबल पर मिला था, जबकि उसकी स्कूटी पूरी रात कार्यालय परिसर में खड़ी रही। जांच एजेंसियां इन दोनों तथ्यों को महत्वपूर्ण साक्ष्य मान रही हैं। पुलिस मोबाइल डेटा रिकवरी, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल गतिविधियों की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन तकनीकी साक्ष्यों से घटना के पीछे की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है। फिलहाल पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ा रही है।