13 साल की सबसे बड़ी गिरावट की ओर सोना! क्या निवेशकों को घबराने की जरूरत है? एक्सपर्ट्स ने दी अहम सलाह
वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। इस साल अपने उच्चतम स्तर से करीब 25% फिसल चुका सोना 2013 के बाद सबसे खराब सालाना प्रदर्शन की ओर बढ़ता दिख रहा है। हालांकि भारतीय बाजार में रुपये की कमजोरी और घरेलू मांग के कारण कीमतों को कुछ सहारा मिला है। ऐसे में निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि क्या अब सोने से दूरी बनानी चाहिए या गिरावट को निवेश के अवसर के रूप में देखना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव, पीक से 25% टूटा सोना
वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में इस वर्ष तेज गिरावट दर्ज की गई है। स्पॉट गोल्ड अपने उच्चतम स्तर से करीब 25 फीसदी नीचे आ चुका है, जिससे यह 13 वर्षों में सबसे कमजोर प्रदर्शन की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक समय सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) माने जाने वाले सोने पर इस बार वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की बदलती रणनीति का असर साफ नजर आ रहा है। लगातार गिरावट के कारण बाजार में सतर्कता बढ़ी है और निवेशक आगे की दिशा को लेकर विशेषज्ञों की राय पर नजर बनाए हुए हैं।
ब्याज दरों में बढ़ोतरी ने घटाई गोल्ड की चमक
महंगाई को नियंत्रित करने के लिए दुनिया के कई केंद्रीय बैंक सख्त मौद्रिक नीति अपना रहे हैं। ब्याज दरें बढ़ने से बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्प अधिक आकर्षक बन गए हैं। इसका सीधा असर सोने पर पड़ा है, क्योंकि गोल्ड कोई निश्चित रिटर्न नहीं देता। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च ब्याज दरों के माहौल में सोने की मांग कमजोर पड़ती है और निवेशक दूसरे विकल्पों की ओर रुख करते हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने पर दबाव बना हुआ है।
पिछले साल की तेज रैली के बाद निवेशकों ने की मुनाफावसूली
बीते वर्ष सोने ने शानदार रिटर्न दिया था, जिसके बाद बड़ी संख्या में निवेशकों ने इस साल मुनाफावसूली की रणनीति अपनाई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि हालिया गिरावट का एक बड़ा कारण यही प्रॉफिट बुकिंग है। जब किसी एसेट में लंबे समय तक तेजी रहती है तो निवेशक लाभ सुरक्षित करने के लिए अपनी हिस्सेदारी कम करते हैं। इससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बनता है। मौजूदा गिरावट को भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
भारतीय बाजार को रुपये की कमजोरी से मिल रहा सहारा
हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना कमजोर हुआ है, लेकिन भारतीय निवेशकों के लिए स्थिति थोड़ी अलग है। रुपये में कमजोरी आने से घरेलू बाजार में सोने की कीमतों को समर्थन मिल रहा है। इसी वजह से भारत में सोने की कीमतों में गिरावट का असर सीमित देखने को मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी बाजारों की तुलना में भारतीय बाजार अपेक्षाकृत अधिक स्थिर रह सकता है और लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह स्थिति फायदेमंद साबित हो सकती है।
एक्सपर्ट्स की राय: घबराने के बजाय रणनीति पर दें ध्यान
बाजार विशेषज्ञों और फंड हाउस का मानना है कि निवेशकों को सोने से पूरी तरह बाहर निकलने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि हालिया गिरावट ने अत्यधिक सट्टेबाजी को कम किया है और अब वैल्यूएशन पहले की तुलना में अधिक संतुलित दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखें और लंबी अवधि के नजरिए से सोने को निवेश का हिस्सा बनाए रखें। किसी बड़ी गिरावट को चरणबद्ध निवेश के अवसर के रूप में देखा जा सकता है।