कुनो से बारां पहुंची चीता वीरा, 15 माह के शावक संग बांझ आमली में डाला डेरा
मध्यप्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान से मादा चीता वीरा एक बार फिर राजस्थान के बारां जिले पहुंच गई है। इस बार उसके साथ 15 माह का शावक KVP-2 भी मौजूद है। दोनों चीते किशनगंज क्षेत्र स्थित बांझ आमली कंजर्वेशन रिजर्व में विचरण कर रहे हैं। वन विभाग उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
बांझ आमली कंजर्वेशन रिजर्व में दर्ज हुई मौजूदगी
वन विभाग के अनुसार मादा चीता वीरा और उसका शावक KVP-2 बारां जिले के किशनगंज क्षेत्र में स्थित बांझ आमली कंजर्वेशन रिजर्व में देखे गए हैं। दोनों चीते पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनकी लोकेशन की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। चीतों की मौजूदगी की पुष्टि होते ही विभागीय टीमें सतर्क हो गईं और इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई।
लगातार की जा रही ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग
उप वन संरक्षक विवेकानंद माणिकराव बड़े के निर्देशन में वन विभाग की विशेष टीमें चीतों की ट्रैकिंग कर रही हैं। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चीतों के प्राकृतिक व्यवहार में किसी प्रकार की बाधा न आए और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सके। साथ ही क्षेत्र में किसी भी संभावित जोखिम पर भी नजर रखी जा रही है।
पहले भी बारां पहुंच चुकी है वीरा
मादा चीता वीरा का बारां जिले से यह पहला संपर्क नहीं है। करीब दो वर्ष पहले भी उसका मूवमेंट जिले के शाहाबाद क्षेत्र में दर्ज किया गया था। उस समय भी उसकी मौजूदगी ने वन्यजीव प्रेमियों और अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया था। अब शावक के साथ दोबारा बारां पहुंचने से वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों में उत्साह का माहौल है।
प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा है मूवमेंट
विशेषज्ञों के अनुसार चीतों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाना उनके प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा है। इससे उनके आवास क्षेत्र, गतिविधियों और अनुकूल वातावरण की जानकारी मिलती है। ऐसे मूवमेंट वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं और इनके अध्ययन से भविष्य की संरक्षण योजनाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
लोगों से सावधानी बरतने की अपील
वन विभाग ने क्षेत्र के ग्रामीणों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे चीतों के नजदीक जाने या उन्हें परेशान करने की कोशिश न करें। यदि किसी स्थान पर चीता दिखाई दे तो तुरंत वन विभाग को सूचना दें। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय लोगों का सहयोग वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए बेहद जरूरी है।