दंगे की काली रात से अदालत के फैसले तक: अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर को उम्रकैद”
साल 2020… राजधानी दिल्ली… और वो खौफनाक दौर, जब सड़कों पर कानून नहीं, बल्कि भीड़ का राज था। आग, पत्थर और नफरत के बीच एक नाम पूरे देश को झकझोर गया—अंकित शर्मा। एक युवा आईबी अधिकारी, जो उस हिंसा का शिकार बना, जिसे आज भी लोग “दिल्ली दंगे” के नाम से याद करते हैं।
अब, करीब 6 साल बाद… इस सनसनीखेज मामले में अदालत का फैसला आ चुका है। आइए जानते हैं—उस काली रात से लेकर कोर्ट के अंतिम फैसले तक की पूरी कहानी।
फरवरी 2020… नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA को लेकर दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों में तनाव लगातार बढ़ रहा था। जाफराबाद, मौजपुर, चांदबाग, करावल नगर और खजूरी खास जैसे इलाके धीरे-धीरे संवेदनशील बनते जा रहे थे।
24 फरवरी को हालात बेकाबू हो गए—सड़कों पर हिंसा भड़क उठी। पथराव, आगजनी और गोलीबारी की घटनाएं आम हो गईं।
25 फरवरी… यही वो दिन था, जब 26 साल के अंकित शर्मा अपने घर से निकले। एक सामान्य दिन… लेकिन ये उनका आखिरी दिन साबित हुआ। कुछ ही घंटों में वो लापता हो गए। परिवार ने तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
अगले दिन—26 फरवरी… खजूरी खास के नाले से एक शव बरामद हुआ।
जब पहचान हुई, तो वो अंकित शर्मा थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने हर किसी को झकझोर दिया—शरीर पर कई गहरे घाव… बेरहमी की हद पार हो चुकी थी।
परिवार ने सीधे तौर पर पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और अन्य लोगों पर हत्या का आरोप लगाया।
दिल्ली पुलिस ने SIT गठित की… जांच शुरू हुई… और धीरे-धीरे कई चौंकाने वाले दावे सामने आए।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, हिंसा के दौरान ताहिर हुसैन का मकान कथित तौर पर दंगाइयों का अड्डा बना हुआ था। छत से पत्थरबाजी, पेट्रोल बम और एसिड फेंके जाने के आरोप लगे।
पुलिस ने दावा किया कि वहां से बड़ी मात्रा में हथियारनुमा सामान बरामद हुआ।
इस केस में चश्मदीद गवाह सामने आए…
फॉरेंसिक रिपोर्ट पेश हुई…
मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक सबूत अदालत में रखे गए। अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि ये हमला सुनियोजित था।
साल 2020 से शुरू हुई ये कानूनी लड़ाई…
2023 में आरोप तय हुए…
और फिर गवाहों, विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों की गवाही का लंबा दौर चला।
करीब 6 साल तक अदालत में इस केस की हर परत को खंगाला गया।
आखिरकार… 13 जुलाई 2026 को अदालत ने ताहिर हुसैन समेत अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया।
कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में सफल रहा है और अब—अदालत ने ताहिर हुसैन को हत्या, अपहरण और दंगा जैसी गंभीर धाराओं में उम्रकैद की सजा सुना दी है।
अभियोजन पक्ष ने इसे बेहद क्रूर और दुर्लभ अपराध बताते हुए मौत की सजा की मांग की थी। वहीं, बचाव पक्ष ने सभी आरोपों से इनकार किया।
लेकिन अदालत ने सबूतों और गवाहों के आधार पर दोष तय किया।
अंकित शर्मा हत्याकांड… सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि उस दौर की याद दिलाता है जब नफरत ने इंसानियत को पीछे छोड़ दिया था।
अब अदालत का फैसला आ चुका है… आरोपी ताहिर को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है ।
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