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चाय बागान मजदूर परिवार से मंत्री पद तक: असम कैबिनेट में शामिल हुए रामेश्वर तेली

हिमंत सरकार में दूसरी बार शपथ, रामेश्वर तेली बने मंत्री

Himanta Biswa Sarma ने मंगलवार को दूसरी बार Assam के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ कई विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ग्रहण की, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा Rameswar Teli की रही। रामेश्वर तेली मूल रूप से Chhattisgarh से जुड़े परिवार से आते हैं। उनके पूर्वज करीब 140 साल पहले अंग्रेजी शासनकाल के दौरान चाय बागानों में मजदूरी करने के लिए असम पहुंचे थे। अब उसी परिवार का बेटा असम सरकार में कैबिनेट मंत्री बना है, जिसे सामाजिक और राजनीतिक रूप से एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

छत्तीसगढ़ से असम तक का संघर्ष और पहचान

रामेश्वर तेली का परिवार उन लाखों छत्तीसगढ़िया परिवारों में शामिल है, जिन्हें ब्रिटिश काल में मजदूरी के लिए असम के चाय बागानों में ले जाया गया था। आज भी असम में करीब 15 लाख से अधिक छत्तीसगढ़ मूल के लोग बसे हुए हैं। वर्षों से वहां रहने के बावजूद इन समुदायों ने अपनी भाषा, लोकगीत और पारंपरिक संस्कृति को जीवित रखा है। खासकर सुआ नाचा और छत्तीसगढ़ी बोली आज भी कई इलाकों में सुनाई देती है। यही वजह है कि रामेश्वर तेली की राजनीतिक सफलता को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़िया समुदाय के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है।

दुलियाजान से जीतकर पहुंचे विधानसभा

Rameswar Teli ने हालिया विधानसभा चुनाव में दुलियाजान सीट से जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार ध्रुबा गोगोई को हराकर विधानसभा में जगह बनाई। इससे पहले वे लगातार दो बार लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं। वर्ष 2014 और 2019 में उन्होंने डिब्रूगढ़ सीट से जीत हासिल कर संसद में असम का प्रतिनिधित्व किया था। बाद में 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री Sarbananda Sonowal के लिए छोड़ दी थी। अब उन्हें हिमंत सरकार में मंत्री बनाकर भाजपा ने चाय बागान क्षेत्रों और ओबीसी समुदाय को बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।

सादगी भरी जिंदगी आज भी कायम

राजनीतिक ऊंचाइयों तक पहुंचने के बावजूद रामेश्वर तेली की सादगी आज भी चर्चा में रहती है। बताया जाता है कि वे अब भी दुलियाजान क्षेत्र के टिपलिंग पुराना घाट इलाके में अपनी मां के साथ साधारण बांस और टिन के घर में रहते हैं। साल 2011 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद उन्होंने आजीविका चलाने के लिए मुर्गी पालन का काम भी किया था। यही संघर्ष और जमीनी जुड़ाव उन्हें आम लोगों के बीच लोकप्रिय बनाता है। भाजपा उन्हें ऊपरी असम और ओबीसी समाज का मजबूत चेहरा मानती है।

असम की राजनीति में छत्तीसगढ़िया समुदाय का बढ़ता प्रभाव

असम के चाय बागान क्षेत्रों में बसे छत्तीसगढ़िया समुदाय का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। यह समुदाय वर्षों से राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सांस्कृतिक स्तर पर भी छत्तीसगढ़ और असम के बीच गहरा संबंध बना हुआ है। दोनों राज्यों के कलाकारों और सांस्कृतिक समूहों के बीच लगातार आदान-प्रदान होता रहता है। रामेश्वर तेली का मंत्री बनना इस समुदाय की राजनीतिक भागीदारी और पहचान को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।

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