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4 घंटे की वार्ता बेनतीजा, लिखित आश्वासन पर अड़े विधायक भाटी; ठेकेदार को बुलाने की मांग तेज

बाड़मेर में गिरल लिग्नाइट माइंस आंदोलन को लेकर प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच देर रात तक चली लंबी वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। करीब चार घंटे चली बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बन पाई। विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने स्पष्ट किया कि बिना लिखित आश्वासन और ठेकेदार की मौजूदगी के समाधान संभव नहीं है, जबकि प्रशासन ने सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया है।

चार घंटे चली बातचीत, फिर भी नहीं निकला समाधान

मंगलवार देर रात जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में प्रशासन और आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच करीब चार घंटे तक गहन चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया। दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई, फिर भी आंदोलन समाप्त करने को लेकर सहमति नहीं बन सकी। प्रशासन ने नरम रुख अपनाते हुए आंदोलनकारियों से धरना खत्म करने की अपील की और उनकी मांगों पर विचार का भरोसा दिया। इसके बावजूद प्रतिनिधिमंडल संतुष्ट नहीं हुआ। अब बुधवार को एक बार फिर वार्ता होने की संभावना है, जिससे समाधान की उम्मीद जताई जा रही है।

लिखित आश्वासन और ठेकेदार की मौजूदगी पर अड़े भाटी

विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने वार्ता के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि मौखिक आश्वासन अब स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मांग रखी कि संबंधित ठेकेदार को वार्ता टेबल पर बुलाया जाए, ताकि सीधे संवाद हो सके। साथ ही उन्होंने सभी मांगों पर लिखित सहमति देने की शर्त रखी। भाटी का कहना था कि पहले भी उपखंड अधिकारी स्तर और कंपनी अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन हर बार ठोस समाधान नहीं निकला। ऐसे में अब केवल लिखित भरोसे से ही आंदोलन खत्म हो सकता है।

आंदोलनकारियों में नाराजगी, जारी रखने के संकेत

आंदोलन में शामिल ग्रामीणों और मजदूरों का कहना है कि वे कई दिनों से धरने पर बैठे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया। उनका आरोप है कि जिम्मेदार पक्ष अब तक संवाद से बचता रहा है। जिला प्रशासन ने मांगों पर सुनवाई और सकारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिया, लेकिन प्रतिनिधिमंडल ने इसे पर्याप्त नहीं माना। वार्ता में शामिल नेताओं और यूनियन प्रतिनिधियों ने साफ संकेत दिए कि जब तक ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।

प्रमुख मांगों पर अड़ा प्रतिनिधिमंडल

आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया हुआ है। इनमें कंपनी द्वारा हटाए गए 100 से अधिक ड्राइवरों और श्रमिकों की पुनर्बहाली प्रमुख है। इसके अलावा 8 घंटे की ड्यूटी व्यवस्था लागू करने, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने, श्रमिकों को नियमानुसार वेतन और बोनस देने, तथा सुरक्षा मानकों और श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित करने की मांग भी शामिल है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि ये सभी मांगें श्रमिकों के अधिकारों से जुड़ी हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कलेक्ट्रेट कूच से बिगड़ी यातायात व्यवस्था

वार्ता से पहले विधायक भाटी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समर्थक और वाहन गिरल से जिला मुख्यालय पहुंचे। इस दौरान जैसलमेर रोड से लेकर कलेक्ट्रेट तक लंबा जाम लग गया। पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर कई रास्तों पर बैरिकेडिंग की, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। आमजन, मरीजों को ले जा रहे वाहन और दैनिक कार्यों के लिए निकले लोग घंटों जाम में फंसे रहे। ट्रैफिक संभालने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी और कई जगहों पर वाहनों को डायवर्ट करना पड़ा।

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