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रामगढ़ में खाद-बीज विक्रेताओं की सांकेतिक हड़ताल, 11 सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन

हड़ताल के जरिए उठाई आवाज, बैठक में बनी रणनीति

रामगढ़ क्षेत्र में खाद, बीज एवं कीटनाशक विक्रेताओं ने अपनी समस्याओं को लेकर एकजुट होकर एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। इस दौरान अग्रवाल धर्मशाला में बैठक आयोजित की गई, जिसमें व्यापारियों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में लंबे समय से लंबित मुद्दों को लेकर असंतोष जाहिर किया गया और आगे की रणनीति तय की गई। वक्ताओं ने कहा कि बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा, जिससे व्यापारियों में रोष बढ़ता जा रहा है।

रैली निकालकर एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

बैठक के बाद व्यापारियों ने गोविंदगढ़ मोड़ से रैली निकाली, जो मुख्य मार्गों से होती हुई एसडीएम कार्यालय पहुंची। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री के नाम बाबूलाल वर्मा को ज्ञापन सौंपा। व्यापारियों ने मांग की कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके। रैली के दौरान व्यापारियों ने नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।

5 लाख व्यापारियों का समर्थन, वर्षों से लंबित समस्याएं

व्यापारियों ने बताया कि यह हड़ताल देशभर में संगठन के आह्वान पर आयोजित की गई, जो लगभग 5 लाख कृषि आदान व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करता है। संघ के सचिव राजवीर गुर्जर ने कहा कि व्यापारी पिछले 10 वर्षों से कई समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और संबंधित विभाग उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, जिससे व्यापारियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

प्रमुख मांगों में टैगिंग रोक और मार्जिन बढ़ाने की मांग

व्यापारियों ने उर्वरक कंपनियों द्वारा सब्सिडी वाले खाद के साथ अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई। साथ ही खाद की डिलीवरी डीलरों के बिक्री केंद्र तक सुनिश्चित करने की बात कही गई, ताकि अतिरिक्त परिवहन खर्च से राहत मिल सके। इसके अलावा महंगाई को देखते हुए उर्वरकों पर डीलर मार्जिन कम से कम 8 प्रतिशत करने, ‘साथी पोर्टल’ को वैकल्पिक बनाने और अवैध बीजों की बिक्री पर रोक लगाने जैसी मांगें भी प्रमुख रहीं।

कानून में बदलाव और जांच व्यवस्था की भी मांग

ज्ञापन में नए बीज अधिनियम और कीटनाशक विधेयक 2025 में संशोधन की मांग भी रखी गई। व्यापारियों ने कहा कि सीलबंद पैकिंग में नमूना फेल होने पर विक्रेता को दोषी न मानकर “साक्षी” माना जाए, क्योंकि गुणवत्ता की जिम्मेदारी कंपनी की होती है। इसके अलावा एक्सपायर्ड कीटनाशकों को कंपनियों द्वारा वापस लेने को अनिवार्य बनाने, शिकायतों की जांच के लिए जिला स्तरीय कमेटी गठित करने और लाइसेंस निलंबन के मामलों में समयबद्ध राहत देने की मांग भी उठाई गई।

चेतावनी: मांगें नहीं मानीं तो होगा बड़ा आंदोलन

व्यापारियों ने साफ कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस दौरान राजीव मित्तल, राजवीर गुर्जर, राजेश गुल्याणी, प्रदीप कपूर, कर्णसिंह, गोपेश गोयल, मुकेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे। व्यापारियों का कहना है कि वे लंबे समय से सरकार से समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन अब उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

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