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बीकानेर में मौत की रफ्तार: जून के पहले 18 दिन में 23 लोगों की मौत, सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल

राजस्थान के बीकानेर जिले में सड़क हादसों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। जून महीने के पहले 18 दिनों में ही 23 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जिससे हर तीसरे दिन एक परिवार उजड़ रहा है। सड़क सुरक्षा अभियान और जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद हादसों में कमी न आना प्रशासन और सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

अभियान के बावजूद नहीं थम रहे हादसे

प्रदेशभर में सड़क सुरक्षा माह और विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसका उद्देश्य लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना और दुर्घटनाओं को कम करना है। लेकिन बीकानेर जिले में इसका असर लगभग न के बराबर दिखाई दे रहा है। ओवरस्पीडिंग, बिना हेलमेट और सीट बेल्ट के वाहन चलाना तथा लापरवाही भरे ड्राइविंग व्यवहार लगातार हादसों की वजह बन रहे हैं।

18 दिनों में 23 मौतें, आंकड़े चिंताजनक

जून के शुरुआती 18 दिनों में जिले में 16 बड़े सड़क हादसे दर्ज किए गए हैं। इनमें 23 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 19 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वहीं ट्रॉमा सेंटर में अब तक 267 से अधिक घायल सड़क दुर्घटनाओं के बाद इलाज के लिए पहुंचे हैं, जिनमें से 13 की मौत अस्पताल में हो चुकी है।

दर्दनाक हादसों ने उजाड़ दिए परिवार

केस 1: एक ही परिवार के 7 लोगों की मौत

15 जून को श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पर सीराजल होटल के पास कार और ट्रेलर की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। इस भीषण हादसे में एक ही परिवार के 7 सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई।

केस 2: दो सगे भाइयों की मौत

16 जून को कालू रोड पर कार और पिकअप की टक्कर में दो सगे भाइयों की जान चली गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

ट्रॉमा सेंटर पर बढ़ता दबाव

पीबीएम अस्पताल बीकानेर के ट्रॉमा सेंटर के सीएमओ डॉ. एल.के. कापिल के अनुसार सड़क हादसों में घायल मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीकानेर और आसपास के जिलों से गंभीर घायल लगातार अस्पताल पहुंच रहे हैं। यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव डाल रही है।

सड़क सुरक्षा अभियान क्या है?

  • जून माह में विशेष सड़क सुरक्षा अभियान चलाया जा रहा है
  • स्कूलों, कॉलेजों और कार्यस्थलों पर जागरूकता कार्यक्रम
  • हेलमेट और सीट बेल्ट की अनिवार्यता पर जोर
  • सुरक्षित ड्राइविंग के लिए अभियान
  • सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए विशेष प्रयास

विशेषज्ञों की राय: सिर्फ अभियान काफी नहीं

सेवानिवृत्त आरपीएस ओमप्रकाश जोशी के अनुसार केवल जागरूकता अभियान से सड़क हादसे नहीं रुक सकते। इसके लिए सख्त नियम पालन, प्रभावी निगरानी और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। विशेषकर युवाओं में हेलमेट और सीट बेल्ट को लेकर गंभीरता विकसित करना समय की आवश्यकता है।

प्रशासन की कार्रवाई और दावे

क्षेत्रीय प्रादेशिक परिवहन अधिकारी अनिल पण्ड्या ने बताया कि ओवरस्पीड और लापरवाही के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा ने कहा कि हाईवे पर निगरानी बढ़ाई गई है और रेस्क्यू वाहनों की तैनाती से दुर्घटनाओं में घायलों को तुरंत मदद दी जा रही है।

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