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किडनी फेलियर से जूझ रहीं 5 प्रसूताओं के परिजनों ने सरकार से लगाई गुहार, ट्रांसप्लांट की मांग को लेकर 48 घंटे का अल्टीमेटम

कोटा: 5 प्रसूताओं के परिजनों ने ट्रांसप्लांट की मांग उठाई

कोटा मेडिकल कॉलेज में पिछले करीब 70 दिनों से भर्ती किडनी फेलियर से पीड़ित पांच प्रसूताओं के परिजनों ने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। परिजनों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सभी महिलाओं का किडनी ट्रांसप्लांट कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि अस्पताल में उपचार के दौरान हुई कथित लापरवाही के कारण मरीजों की स्थिति गंभीर हुई। प्रशासन से जल्द निर्णय नहीं होने पर परिजनों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी है।

परिजनों ने ट्रांसप्लांट की मांग के साथ सौंपा ज्ञापन

पीड़ित परिवारों ने जिला प्रशासन को दिए ज्ञापन में कहा कि अस्पताल में भर्ती पांचों महिलाएं पिछले लगभग 70 दिनों से नियमित डायलिसिस पर हैं। उनका कहना है कि लगातार डायलिसिस के कारण मरीजों को शारीरिक और मानसिक रूप से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन में मांग की गई है कि राज्य सरकार सभी मरीजों के किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था कराए और उनके उपचार की पूरी जिम्मेदारी उठाए। परिजनों ने कहा कि लंबे समय से चल रहे इलाज के कारण परिवार आर्थिक और मानसिक दबाव में भी है।

अस्पताल की कथित लापरवाही का लगाया आरोप

परिजनों का आरोप है कि 4 मई से 8 मई के बीच डिलीवरी के लिए भर्ती हुई महिलाओं की हालत उपचार के दौरान बिगड़ी और बाद में उनकी दोनों किडनियां प्रभावित हो गईं। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर कथित लापरवाही और उपचार प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया संबंधित स्तर पर जारी है। अस्पताल प्रशासन की ओर से इस संबंध में जो भी आधिकारिक निष्कर्ष सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

लगातार डायलिसिस से बढ़ रही मरीजों और परिवारों की चिंता

अस्पताल में भर्ती रागिनी मीणा, आरती चौबदार, पिंकी, सुशीला और धन्नी सुमन का उपचार फिलहाल डायलिसिस के माध्यम से चल रहा है। परिजनों का कहना है कि बार-बार डायलिसिस कराना मरीजों के लिए बेहद कष्टदायक साबित हो रहा है और इससे उनका सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। उनका कहना है कि परिवार लगातार अस्पताल में रहकर इलाज करा रहा है, जिससे आर्थिक स्थिति भी कमजोर होती जा रही है। इसी वजह से उन्होंने स्थायी उपचार के तौर पर किडनी ट्रांसप्लांट की मांग दोहराई है।

48 घंटे में निर्णय नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

परिजनों ने प्रशासन को दिए ज्ञापन में कहा है कि यदि 48 घंटे के भीतर ट्रांसप्लांट और उपचार को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो वे अपना विरोध और तेज करेंगे। उन्होंने प्रशासन से मामले में मानवीय आधार पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है। दूसरी ओर, मामले को लेकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है। इस पूरे प्रकरण की जांच और उपचार से जुड़े तथ्यों के सामने आने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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