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‘सतलुज’ विवाद पर CM भगवंत मान की चुप्पी क्यों? पंजाब की सियासत में तेज हुई बहस

पंजाबी फिल्म ‘सतलुज’ को OTT प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद पंजाब की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस, बीजेपी और आम आदमी पार्टी के कई नेता फिल्म को लेकर अपनी-अपनी राय रख चुके हैं, लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत मान अब तक सार्वजनिक रूप से कुछ भी नहीं बोले हैं। उनकी चुप्पी और पिछले कई दिनों से पंजाब से बाहर रहने को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि AAP इसे राजनीतिक रूप से अनावश्यक विवाद मान रही है।

फिल्म हटने के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद

3 जुलाई को रिलीज हुई फिल्म ‘सतलुज’ को कुछ ही समय बाद OTT प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया, जिसके बाद पंजाब में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी के कई नेताओं ने फिल्म को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं ने भी फिल्म के प्रदर्शन के समर्थन में बयान दिए, लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी। इसी वजह से उनकी चुप्पी राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई है।

पंजाब से बाहर रहे मुख्यमंत्री

विवाद के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान कई दिनों तक पंजाब से बाहर रहे। इस दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से केवल चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में लोगों से भागीदारी की अपील की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री ने जानबूझकर इस विवाद पर टिप्पणी करने से परहेज किया, जबकि विपक्ष इसे जिम्मेदारी से बचने की कोशिश बता रहा है। इस मुद्दे पर सरकार की ओर से प्रतिक्रिया मुख्य रूप से पार्टी नेताओं और अन्य पदाधिकारियों ने दी।

फिल्म का राजनीतिक असर भी चर्चा में

‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन से प्रेरित बताई जा रही है। ऐसे में फिल्म पंजाब के उग्रवाद से जुड़े संवेदनशील दौर की याद दिलाती है। माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए सभी राजनीतिक दल इस मुद्दे पर बेहद सावधानी से अपनी रणनीति तय कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार किसी भी बयान का चुनावी असर पड़ सकता है, इसलिए दल संतुलित रुख अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।

AAP की रणनीति क्या है?

आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि पार्टी फिल्म के प्रदर्शन का विरोध नहीं करती, लेकिन इस विवाद को अनावश्यक रूप से बड़ा भी नहीं बनाना चाहती। पार्टी का मानना है कि मुख्यमंत्री की सीधी प्रतिक्रिया से विवाद और अधिक राजनीतिक रूप ले सकता है। इसी वजह से संगठन स्तर पर बयान दिए जा रहे हैं, जबकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि निजी स्क्रीनिंग का विरोध नहीं किया जाएगा और फिल्म के प्रदर्शन से जुड़े फैसले केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

विपक्ष के आरोप और सरकार का जवाब

विपक्ष ने इस पूरे विवाद के साथ पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह की रिहाई से जुड़े पुराने मामले को भी उठाया है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि सरकार ने इस मामले में पर्याप्त कार्रवाई नहीं की। हालांकि, पंजाब सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि दोषियों की रिहाई से जुड़े सभी निर्णय कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत हुए थे। सरकार के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री ने ऐसी किसी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए थे और विपक्ष के आरोप राजनीतिक उद्देश्य से लगाए जा रहे हैं।

राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश

विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की चुप्पी एक राजनीतिक रणनीति भी हो सकती है। ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर बयान देने से विवाद और गहरा सकता है तथा विपक्ष को सरकार पर हमले का नया अवसर मिल सकता है। फिलहाल सरकार अपनी कल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक एजेंडे पर ध्यान केंद्रित करने का संदेश देने की कोशिश कर रही है, जबकि ‘सतलुज’ विवाद पंजाब की राजनीति में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।

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