दिवाली पर पटाखों को लेकर सोनी राजदान का बयान, बोलीं- ‘एंटी लाइफ और एंटी हेल्थ’ है यह सोच
दिवाली पर पटाखे जलाने को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। अभिनेत्री दीया मिर्जा के बाद अब वरिष्ठ अभिनेत्री सोनी राजदान ने भी पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि जहरीली हवा का सबसे ज्यादा असर बच्चों की सेहत पर पड़ता है। साथ ही, उन्होंने पटाखे जलाने को सही ठहराने वाली सोच पर सवाल उठाए हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

मुख्य बातें
- दीया मिर्जा के बाद सोनी राजदान ने पटाखों पर जताई नाराजगी
- ‘एक पटाखा भी सही नहीं’, सोनी राजदान ने प्रदूषण पर उठाए सवाल
- दिवाली पर पटाखों को लेकर बॉलीवुड में फिर छिड़ी बहस
BOMBAY, 04 NOV. 2026:
पटाखों के खिलाफ दीया मिर्जा की अपील से शुरू हुआ विवाद
दिवाली पर पटाखों के इस्तेमाल को लेकर अभिनेत्री दीया मिर्जा ने लोगों से प्रदूषण कम करने की अपील की थी। उन्होंने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के एक जागरूकता वीडियो में हिस्सा लिया था। इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो गया। विवाद बढ़ने के बाद BMC ने वीडियो को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दिया था। हालांकि, मामला बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंचा। अदालत ने वीडियो को दोबारा अपलोड करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस जारी रही।
सोनी राजदान ने भी पटाखे जलाने पर उठाए सवाल
दीया मिर्जा के बाद अब अभिनेत्री सोनी राजदान ने भी पटाखों से होने वाले प्रदूषण पर अपनी राय रखी है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि वायु प्रदूषण का असर केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है। इसका सीधा प्रभाव बच्चों की सेहत और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि त्योहार मनाते समय आसपास के लोगों की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
बच्चों की सेहत और पढ़ाई पर प्रदूषण का असर
सोनी राजदान ने अपनी पोस्ट में बच्चों की परेशानी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों के माता-पिता से पूछने पर पता चलेगा कि खराब हवा के कारण उन्हें कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। प्रदूषण के चलते कई बच्चे बीमार पड़ते हैं और उन्हें कई दिनों तक स्कूल से दूर रहना पड़ता है। इससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती है। अभिनेत्री के मुताबिक, जब बच्चों के लिए सामान्य रूप से सांस लेना मुश्किल हो रहा हो, तब मनोरंजन और जश्न के नाम पर पटाखे जलाने पर विचार करना जरूरी है।
‘एंटी लाइफ और एंटी हेल्थ’ बताई पटाखों के समर्थन की सोच
सोनी राजदान ने अपने बयान में कहा कि अगर गंभीर प्रदूषण के बावजूद कोई व्यक्ति केवल एक पटाखा जलाने को सही ठहराता है, तो यह सोच ‘एंटी लाइफ, एंटी हेल्थ और एंटी नेशनल’ है। उन्होंने स्वास्थ्य को एक ऐसा फैसला बताया, जिसे लोग अपने और आने वाली पीढ़ियों के लिए चुनते हैं। उनका कहना है कि बच्चों की सेहत को ध्यान में रखकर ही त्योहारों से जुड़े फैसले लेने चाहिए। उनकी इस टिप्पणी के बाद पटाखों और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सोशल मीडिया पर बहस फिर तेज हो गई है।
दिवाली पर पटाखों को लेकर दो अलग-अलग राय
पटाखों को लेकर हर साल पर्यावरण, स्वास्थ्य और परंपरा के बीच बहस देखने को मिलती है। एक ओर प्रदूषण कम करने और बच्चों सहित संवेदनशील लोगों की सेहत बचाने की अपील की जाती है। वहीं, दूसरी ओर कई लोग पटाखों को त्योहार की परंपरा और उत्सव से जोड़कर देखते हैं। ऐसे में यह मुद्दा केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत पसंद से भी जुड़ जाता है।
प्रशासन का पक्ष
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