#पॉलिटिक्स #राज्य-शहर

परिसीमन बिल लोकसभा में फेल: मोदी सरकार को झटका

लोकसभा में पेश संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सका, जिससे मोदी सरकार की लोकसभा विस्तार और महिला आरक्षण से जुड़े बड़े बदलाव की योजना को झटका लगा है।

दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सकी सरकार

Narendra Modi सरकार द्वारा लाया गया यह महत्वपूर्ण संविधान संशोधन बिल लोकसभा में पारित नहीं हो पाया। सदन में मौजूद 528 सांसदों में से 298 ने समर्थन किया, जबकि 230 सांसदों ने विरोध में मतदान किया। चूंकि यह संवैधानिक संशोधन था, इसलिए इसे पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट जरूरी थे। सरकार इस आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी, जिससे यह विधेयक गिर गया। यह परिणाम सत्तापक्ष के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

क्या था इस बिल का उद्देश्य?

इस विधेयक के जरिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर चुनावी ढांचे में बड़ा बदलाव करने की योजना थी। मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर लगभग 850 तक ले जाने का प्रस्ताव था। इसके साथ ही इसे महिला आरक्षण से जोड़कर एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा था। सरकार इसे लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित बनाने वाला ऐतिहासिक सुधार बता रही थी।

संविधान संशोधन की प्रक्रिया बनी बाधा

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किसी भी संशोधन के लिए “डबल लॉक” व्यवस्था लागू होती है। इसका मतलब है कि सदन की कुल संख्या का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई समर्थन जरूरी होता है। हालांकि सरकार के पास साधारण बहुमत था, लेकिन दो-तिहाई बहुमत की शर्त पूरी नहीं हो सकी। इसी वजह से यह महत्वपूर्ण बिल पारित नहीं हो पाया।

विपक्ष का कड़ा विरोध पड़ा भारी

विपक्षी दल पहले से ही इस बिल का विरोध कर रहे थे। उनका तर्क था कि परिसीमन को महिला आरक्षण से जोड़ना राजनीतिक रणनीति है और इससे प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है। कई दलों ने यह भी आशंका जताई कि जनसंख्या आधारित सीटों के पुनर्वितरण से कुछ राज्यों को नुकसान हो सकता है। इसी कारण अधिकांश विपक्षी दल अपने रुख पर कायम रहे और सरकार के पक्ष में समर्थन नहीं दिया।

सरकार की अंतिम कोशिशें भी नाकाम

वोटिंग से पहले Narendra Modi ने सोशल मीडिया के जरिए समर्थन जुटाने की अपील भी की थी। वहीं संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने भी बिल पारित कराने के लिए प्रयास किए। लेकिन अंततः समर्थन पर्याप्त नहीं मिला। नतीजों के बाद सरकार ने इस बिल के साथ जुड़े अन्य प्रस्तावों को भी आगे नहीं बढ़ाने का फैसला लिया।

आगे क्या?

इस विधेयक के खारिज होने के बाद अब सरकार को यदि इस दिशा में आगे बढ़ना है तो नई रणनीति के साथ फिर से प्रयास करना होगा। वहीं, यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बना रहेगा, खासकर 2029 चुनावों के संदर्भ में।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *