Delhi-NCR Diwali Crackers: दिवाली पर पटाखे चलेंगे या नहीं? सुप्रीम कोर्ट तलाश रहा बीच का रास्ता, अलवर का AQI 150 पार
दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के इस्तेमाल को लेकर असमंजस बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट पूर्ण प्रतिबंध के बजाय व्यावहारिक समाधान तलाश रहा है। अदालत ने लोगों को पटाखों से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया है। इस बीच राजस्थान के अलवर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 150 के पार पहुंच गया है, जबकि भिवाड़ी में यह 170 से ऊपर दर्ज किया गया। ऐसे में दिवाली के दौरान प्रदूषण नियंत्रण की चुनौती बढ़ गई है।
दिवाली पर पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
दिवाली नजदीक आने के साथ दिल्ली-एनसीआर में पटाखे चलाने की अनुमति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पटाखे चलाने की अनुमति देने पर कोई राहत नहीं दी है। हालांकि, अदालत पूर्ण प्रतिबंध के बजाय बीच का रास्ता तलाशने पर विचार कर रही है।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण और पटाखों के इस्तेमाल से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही है।सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि केवल प्रतिबंध लगाने के बजाय लोगों को पटाखों से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है। लोगों को स्वेच्छा से कम पटाखे चलाने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया।
पूर्ण प्रतिबंध के बजाय व्यावहारिक समाधान की तलाश
सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि केवल पटाखे चलाने का समय तय कर देने से प्रदूषण की समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं होगा। दिल्ली-एनसीआर की हर गली में नियमों की निगरानी करना भी चुनौतीपूर्ण है।इसी वजह से अदालत ऐसा विकल्प तलाश रही है, जिससे त्योहार की परंपराओं और प्रदूषण नियंत्रण के बीच संतुलन बनाया जा सके। इस मामले में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) से सुझाव मांगे गए हैं।अदालत के सामने अब यह तय करना महत्वपूर्ण होगा कि पटाखों के इस्तेमाल को लेकर कौन-सी व्यवस्था व्यावहारिक होगी और उससे प्रदूषण कम करने में कितनी मदद मिल सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में एक-दो दिन में फैसला आने की संभावना जताई गई है। अंतिम निर्णय आने तक पटाखों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अलवर में AQI 150 के पार, भिवाड़ी में 170 से अधिक
दूसरी ओर, राजस्थान के अलवर और भिवाड़ी में भी वायु प्रदूषण बढ़ने की जानकारी सामने आई है। मानसून की विदाई के बाद अलवर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 150 से ऊपर पहुंच गया है। वहीं, भिवाड़ी में AQI 170 के पार दर्ज किया गया।दोनों शहरों में हवा की गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बताई गई है। हालांकि, प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी चिंता का विषय है। दिवाली के दौरान पटाखों का इस्तेमाल बढ़ने से हवा की गुणवत्ता पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।अलवर और भिवाड़ी में प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता की निगरानी महत्वपूर्ण रहेगी। स्थानीय स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर भी नजर रहेगी।
बढ़ते प्रदूषण से किन लोगों को अधिक खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, हवा में प्रदूषण बढ़ने से अस्थमा, हृदय रोग और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को परेशानी हो सकती है। बच्चों और बुजुर्गों को भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।प्रदूषण अधिक होने पर लोगों को खुले में लंबे समय तक रहने से बचना चाहिए। सांस लेने में परेशानी या अन्य लक्षण महसूस होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।दिवाली के दौरान पटाखों का धुआं हवा में मौजूद प्रदूषकों की मात्रा बढ़ा सकता है। इसलिए त्योहार मनाते समय आसपास के लोगों की सेहत और पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है।
दिवाली से पहले प्रदूषण नियंत्रण की चुनौती
दिल्ली-एनसीआर में पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला और राजस्थान के शहरों में बढ़ता AQI, दोनों ही प्रदूषण नियंत्रण की चुनौती को सामने रखते हैं।अब सभी की नजर अदालत के अंतिम निर्णय पर है। पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा या इस्तेमाल को लेकर कुछ शर्तें तय होंगी, यह फैसला आने के बाद ही स्पष्ट होगा।इस बीच अलवर और भिवाड़ी में वायु गुणवत्ता की निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय महत्वपूर्ण रहेंगे। दिवाली के दौरान प्रदूषण कम रखने के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी होगी।