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Jaipur Cyber Fraud: पुलवामा हमले के नाम पर 2.70 लाख की ठगी, करधनी में भी 3.06 लाख का फ्रॉड

जयपुर में साइबर ठगी के दो मामले सामने आए हैं। चौमूं में एक व्यक्ति को पुलवामा हमले में फंसाने का डर दिखाकर 2 लाख 70 हजार रुपये ठगने का आरोप है। आरोपी ने खुद को एसटीएफ अधिकारी बताया था। वहीं, करधनी थाना क्षेत्र में एक अन्य व्यक्ति से 3 लाख 6 हजार 925 रुपये की साइबर धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ है। पुलिस ने दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

एसटीएफ अधिकारी बनकर पुलवामा हमले में फंसाने की धमकी

जयपुर के चौमूं थाना क्षेत्र में साइबर ठगी का मामला सामने आया है। पुरोहितों का मोहल्ला निवासी संतोष कुमार सिकलीगर ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने खुद को एसटीएफ अधिकारी बताया। उसने संतोष कुमार को डराया कि पुलवामा हमले से जुड़े मामले में उनके नाम से किसी अन्य व्यक्ति ने फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल किया है। इस तरह कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर आरोपी ने उनसे 2 लाख 70 हजार रुपये ठग लिए।पुलिस ने 14 अक्टूबर 2026 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया। अब आरोपी की पहचान और ठगी से जुड़े लेनदेन की जांच की जा रही है।

फर्जी सिम और जांच एजेंसी का डर दिखाकर ठगी

इस मामले में आरोपी ने कथित तौर पर जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर पीड़ित पर दबाव बनाया। पुलवामा हमले जैसे गंभीर मामले का नाम लेकर उसे कार्रवाई में फंसने का डर दिखाया गया।ऐसे मामलों में ठग अक्सर खुद को पुलिस या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों से पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं। वे गिरफ्तारी, फर्जी दस्तावेज या किसी गंभीर अपराध में नाम आने की बात कहकर पीड़ित को घबराहट में फैसला लेने के लिए मजबूर कर सकते हैं।हालांकि, चौमूं के मामले में आरोपी ने किस तरह संपर्क किया और रकम किस माध्यम से ली, इसकी पूरी जानकारी पुलिस जांच के बाद सामने आएगी।

करधनी में 3,06,925 रुपये की साइबर धोखाधड़ी

जयपुर के करधनी थाना क्षेत्र में भी साइबर ठगी का एक अन्य मामला दर्ज हुआ है। विनायक एन्क्लेव, कालवाड़ रोड निवासी 53 वर्षीय जयदेव सिंह चरण ने धोखाधड़ी की शिकायत की है।पुलिस के अनुसार, परिवादी की ऑनलाइन शिकायत साइबर थाने से करधनी थाने भेजी गई थी। इसके बाद 13 अक्टूबर को मामला दर्ज किया गया। शिकायत में 3 लाख 6 हजार 925 रुपये की साइबर धोखाधड़ी का उल्लेख है।इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस अब शिकायत और लेनदेन से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

दोनों मामलों में पुलिस जांच जारी

जयपुर में सामने आए इन दोनों मामलों में ठगी के तरीके अलग बताए गए हैं। चौमूं के मामले में आरोपी पर एसटीएफ अधिकारी बनकर डराने का आरोप है। वहीं, करधनी के मामले में ऑनलाइन माध्यम से रकम की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज हुई है।पुलिस दोनों मामलों में संबंधित लेनदेन, शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपियों ने किस तरीके से ठगी की और रकम किन खातों में पहुंची।

साइबर ठगी से बचने के लिए क्या करें?

पुलिस की सलाह है कि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, एसटीएफ या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन पर डराए, तो घबराकर पैसे ट्रांसफर न करें।

  • किसी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, बैंक पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी न दें।
  • गिरफ्तारी या जांच के नाम पर पैसे मांगने वाले कॉल की आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करें।
  • संदिग्ध कॉल, संदेश और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
  • साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

समय रहते शिकायत करने से रकम के लेनदेन का पता लगाने और संभावित नुकसान को रोकने में मदद मिल सकती है।

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