#राज्य-शहर #सोशल

कोला डूंगरी की बेटियों ने लिखी मिसाल: 150 पौधों में बसाईं यादें, ‘बहन-बेटी वाटिका’ बनी रिश्तों की पहचान

अलवर जिले के कोला डूंगरी गांव में आयोजित बाइसा-भुवासा स्नेह मिलन समारोह केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि रिश्तों, पर्यावरण संरक्षण और भावनात्मक जुड़ाव का अनूठा संगम बन गया। ‘हरियालो राजस्थान’ अभियान के तहत गांव की 150 से अधिक बहन-बेटियों और भुवासाओं ने पौधारोपण कर एक नई परंपरा की शुरुआत की। इस पहल ने न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, बल्कि गांव और उसकी बेटियों के बीच स्नेह के बंधन को भी और मजबूत किया।

‘एक पौधा बहन-बेटी के नाम’ अभियान से जुड़ा भावनात्मक संदेश

राजस्थान सरकार के ‘हरियालो राजस्थान’ अभियान के अंतर्गत आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम में गांव की बहन-बेटियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। समारोह के अंतिम दिन महिलाओं ने अपने हाथों से पौधे रोपे और उन्हें अपने जीवन की यादों और रिश्तों से जोड़ दिया। आयोजन का उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं था, बल्कि बेटियों और उनके मायके के बीच भावनात्मक संबंधों को भी सहेजना था। गांव की महिलाओं ने कहा कि ये पौधे आने वाले वर्षों में उनकी मौजूदगी और अपनत्व का प्रतीक बनकर खड़े रहेंगे।

‘बहन-बेटी वाटिका’ बनी अपनत्व और स्मृतियों का प्रतीक

पौधारोपण के लिए चयनित स्थान को विशेष रूप से ‘बहन-बेटी वाटिका’ नाम दिया गया। यह वाटिका अब केवल हरियाली का केंद्र नहीं, बल्कि गांव की बेटियों और उनके परिवारों की यादों का जीवंत प्रतीक बन गई है। कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि पौधे लगाने का कार्य बहन-बेटियों ने किया, जबकि उनकी देखभाल और संरक्षण का दायित्व गांव के भाइयों और भतीजों ने स्वीकार किया। उन्होंने संकल्प लिया कि इन पौधों की रक्षा उसी जिम्मेदारी से करेंगे, जैसे परिवार और रिश्तों की करते हैं।

वन मंत्री संजय शर्मा ने की पहल की सराहना

राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री Sanjay Sharma ने भी इस पहल की खुले दिल से प्रशंसा की। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कार्यक्रम की जानकारी साझा करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण तभी सफल हो सकता है जब उसमें आमजन की सक्रिय भागीदारी हो। मंत्री ने कोला डूंगरी की इस पहल को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज को प्रकृति और परिवार दोनों के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देते हैं।

स्नेह मिलन में दिखा संस्कृति, परिवार और आस्था का संगम

तीन दिवसीय स्नेह मिलन समारोह के दौरान सामाजिक मेल-मिलाप के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। एकादशी के अवसर पर महिलाओं ने विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्रा कर दर्शन किए। इससे कार्यक्रम में आध्यात्मिकता का रंग भी जुड़ गया। गांव की बुजुर्ग महिलाओं से लेकर युवा पीढ़ी तक सभी ने इस आयोजन को रिश्तों को फिर से जीने और पुराने संबंधों को ताजा करने का अवसर बताया। कार्यक्रम ने सामाजिक एकता और पारिवारिक मूल्यों को भी नई ऊर्जा प्रदान की।

विदाई के समय छलक पड़े जज्बात

समारोह के समापन पर माहौल भावुक हो गया। वर्षों बाद एकत्रित हुई बहन-बेटियों की आंखों में विदाई के समय खुशी और भावुकता दोनों दिखाई दी। महिलाओं ने कहा कि तीन दिनों तक मिला अपनापन उन्हें बचपन की यादों में वापस ले गया। उन्होंने बताया कि यह आयोजन केवल मिलन नहीं, बल्कि रिश्तों को दोबारा महसूस करने का अवसर था। गांव में लगाए गए पौधे अब उनकी स्मृतियों, प्रेम और जुड़ाव के प्रतीक बनकर आने वाली पीढ़ियों को भी इस स्नेह की कहानी सुनाएंगे।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *