CJP संसद मार्च: जंतर-मंतर से निकले प्रदर्शनकारियों पर पुलिस का बल प्रयोग, कई नेता और कलाकार पहुंचे
दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान उस समय तनाव बढ़ गया जब प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं होने का हवाला देते हुए भीड़ को रोकने के लिए बल प्रयोग किया। इस प्रदर्शन में सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो सहित कई राजनीतिक नेताओं और फिल्मी हस्तियों ने भी हिस्सा लिया। वहीं, आंदोलन से जुड़े नेताओं ने सरकार से संवाद की मांग दोहराई।
संसद की ओर बढ़ते प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोका
जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। पुलिस का कहना था कि संसद तक मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद जब कुछ प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने लगे तो हालात तनावपूर्ण हो गए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और लोगों को पीछे हटाने की कार्रवाई की। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।
गीतांजलि आंगमो ने आंदोलन में दर्ज कराई मौजूदगी
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो भी प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जंतर-मंतर पहुंचीं। उन्होंने आंदोलन में मौजूद लोगों का हौसला बढ़ाया और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखने की अपील की। आंदोलन का केंद्र शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दे बताए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
महुआ मोइत्रा, चंद्रशेखर आजाद और कलाकार भी पहुंचे
प्रदर्शन में कई राजनीतिक और सांस्कृतिक हस्तियां भी शामिल हुईं। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा जंतर-मंतर पहुंचीं, जबकि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी आंदोलन में भाग लिया। इसके अलावा अभिनेत्री शबाना आजमी और अभिनेता प्रकाश राज ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इन नेताओं और कलाकारों ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का समर्थन करते हुए प्रदर्शनकारियों की मांगों पर संवाद की आवश्यकता बताई।
चंद्रशेखर आजाद बोले- युवाओं की आवाज उठाने आया हूं
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वह युवाओं के साथ एकजुटता दिखाने के लिए प्रदर्शन में पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध नागरिकों का अधिकार है और सरकार को इन मांगों पर सकारात्मक पहल करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न संस्थाएं अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं, लेकिन युवाओं की आवाज को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए।
सौरव दास ने सरकार से बातचीत की उम्मीद जताई
CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार है। उनके मुताबिक प्रशासन की ओर से संवाद की कोशिश हुई है, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट प्रस्ताव सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि अब आगे की पहल सरकार को करनी चाहिए। दास ने यह भी दावा किया कि सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है और उन्होंने आंदोलन में शामिल युवाओं के लिए शुभकामनाएं भेजी हैं। उन्होंने दोहराया कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा और संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठाता रहेगा।
संजय राउत के बयान पर भी हुई चर्चा
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों को संसद तक मार्च निकालने की अनुमति नहीं मिलती, तो आंदोलन को अन्य संवैधानिक संस्थानों की ओर ले जाने पर विचार किया जा सकता है। उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, इस पर विभिन्न दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।