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बुटाटी धाम मंदिर में 22 करोड़ से ज्यादा की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला, खातों पर रोक और प्रशासक नियुक्ति की सिफारिश

बुटाटी धाम मंदिर में 22 करोड़ गड़बड़ी का मामला गरमाया

राजस्थान के नागौर जिले स्थित प्रसिद्ध बुटाटी धाम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विवाद गहरा गया है। जांच समिति की रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया करीब 22.74 करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ी का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के आधार पर मंदिर समिति के बैंक खातों, सावधि जमा और ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाने तथा मंदिर संचालन के लिए प्रशासक नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। वहीं, मंदिर विकास समिति ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

जांच समिति ने खातों को फ्रीज करने की दी सलाह

जिला प्रशासन को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में समिति ने मंदिर विकास समिति से जुड़े बैंक खातों, एफडी और डिजिटल भुगतान प्रणालियों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की अनुशंसा की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन खातों का नियंत्रण नवनियुक्त प्रशासक को सौंपा जाना चाहिए। इसके साथ ही मंदिर की दैनिक पूजा व्यवस्था और अन्य धार्मिक गतिविधियों को सुचारू रखने के लिए किसी राजपत्रित अधिकारी को प्रशासक नियुक्त करने की सिफारिश की गई है।

22.74 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का दावा

जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर समिति के कार्यकाल के दौरान प्रथम दृष्टया करीब 22 करोड़ 74 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितताओं, देवस्थान निधियों के कथित दुरुपयोग और अन्य अनियमितताओं की बात सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। प्रशासन की ओर से मामले में आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

सांसद हनुमान बेनीवाल ने कार्रवाई की मांग उठाई

मामले को लेकर सांसद हनुमान बेनीवाल सहित कई जनप्रतिनिधियों ने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़ी वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। सांसद ने इस मामले को श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

मंदिर समिति अध्यक्ष ने रिपोर्ट पर उठाए सवाल

वहीं, बुटाटी धाम संत श्री चतुरदास महाराज मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने जांच रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया में समिति का पक्ष सही तरीके से नहीं सुना गया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि समिति की ओर से मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन इसके बावजूद रिपोर्ट तैयार कर दी गई।

समिति ने दोबारा जांच की मांग की

मंदिर समिति अध्यक्ष ने जांच रिपोर्ट को निष्पक्ष नहीं बताते हुए नए सिरे से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच किसी अन्य अधिकारी से कराई जानी चाहिए ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। फिलहाल बुटाटी धाम मंदिर से जुड़े इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।

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