बूंदी पंचायत चुनाव: एक दशक बाद मतपत्रों पर हाथ से लिखे जाएंगे प्रत्याशियों के नाम, 17.91 लाख बैलेट पेपर तैयार
बूंदी: राजस्थान के पंचायती राज चुनाव में करीब एक दशक बाद मतदान कार्मिकों को फिर मतपत्रों पर प्रत्याशियों के नाम हाथ से लिखने की जिम्मेदारी निभानी होगी। सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से कराए जाएंगे। बूंदी जिले में इन चुनावों के लिए कुल 17 लाख 91 हजार 720 मतपत्र छपवाए गए हैं। इनमें वार्ड पंच के लिए गुलाबी और सरपंच पद के लिए सफेद मतपत्र शामिल हैं। प्रत्याशियों के नाम और चुनाव चिह्न तय होने के बाद कर्मचारियों को मतपत्रों पर नाम लिखने, उनकी जांच करने और गड्डियां तैयार करने का काम करना होगा। जिले में तीसरे और चौथे चरण के तहत 5 और 16 नवंबर को मतदान प्रस्तावित है।
करीब एक दशक बाद हाथ से नाम लिखने की प्रक्रिया
पंचायती राज चुनाव में सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए बैलेट पेपर से मतदान कराया जाएगा। मतपत्रों पर चुनाव चिह्न पहले से छपे होंगे, लेकिन प्रत्याशियों के नाम हाथ से लिखने होंगे।इसके लिए मतदान कार्मिकों को प्रत्येक मतपत्र पर संबंधित उम्मीदवार का नाम दर्ज करना होगा। इसके बाद नामों की शुद्धता जांचनी होगी और मतपत्रों को क्रमवार व्यवस्थित कर गड्डियां बनानी होंगी। यह काम बड़ी संख्या में मतपत्रों के कारण समय लेने वाला हो सकता है। कर्मचारियों को तेजी के साथ सावधानी भी बरतनी होगी, ताकि नाम लिखने में कोई गलती न हो।
जिले में छपवाए गए 17.91 लाख से अधिक मतपत्र
बूंदी जिले में पंच और सरपंच चुनाव के लिए कुल 17 लाख 91 हजार 720 मतपत्र छपवाए गए हैं। इनमें दोनों पदों के लिए अलग-अलग रंग के बैलेट पेपर शामिल हैं।
- वार्ड पंच: 8 लाख 29 हजार 440 गुलाबी मतपत्र
- सरपंच: 9 लाख 67 हजार 680 सफेद मतपत्र
इन मतपत्रों पर चुनाव चिह्न पहले से छपे होंगे। प्रत्याशियों के नाम हाथ से लिखने के बाद उनकी जांच की जाएगी। इसके बाद मतदान के लिए मतपत्रों की गड्डियां तैयार होंगी। नामों की शुद्धता और मतपत्रों का सही क्रम बनाए रखना इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
हजारों मतपत्र तैयार करने में लग सकता है लंबा समय
एक मतपत्र पर प्रत्याशी का नाम लिखने में औसतन 30 से 40 सेकंड लगने का अनुमान है। ऐसे में बड़ी संख्या में मतपत्र तैयार करने में कर्मचारियों को काफी समय देना पड़ सकता है। नाम लिखने के अलावा उनकी जांच और गड्डियां बनाने का काम भी करना होगा।किसी प्रत्याशी के नाम में गलती होने पर मतदान के दौरान भ्रम की स्थिति बन सकती है। इसलिए कर्मचारियों को हर मतपत्र की सावधानीपूर्वक जांच करनी होगी। बड़ी ग्राम पंचायतों में मतदाताओं और प्रत्याशियों की संख्या अधिक होने से यह काम और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
दो-तीन रातें जागकर करनी पड़ सकती है तैयारी
जिले की 235 ग्राम पंचायतों के 2,201 गांवों में चुनाव होने हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 7 लाख 16 हजार 102 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। चुनावी प्रक्रिया के लिए लगभग पांच हजार कार्मिकों की ड्यूटी लगाने की तैयारी है।मतदान कार्मिकों को पहले जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव से जुड़ी जिम्मेदारियां निभानी होंगी। इसके बाद सरपंच और पंच चुनाव के लिए मतपत्र तैयार करने होंगे। ऐसे में नाम लिखने, जांच और मतदान सामग्री व्यवस्थित करने के लिए देर रात तक काम करना पड़ सकता है। इसके बाद सुबह 7 बजे से मतदान शुरू कराने और शाम को मतगणना की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
तालेड़ा में सबसे ज्यादा वार्ड, नैनवां में अधिक मतदाता
बूंदी जिले की पंचायत समितियों में ग्राम पंचायतों, वार्डों और मतदाताओं की संख्या अलग-अलग है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नैनवां पंचायत समिति की 39 ग्राम पंचायतों में 385 वार्ड हैं। यहां 1 लाख 29 हजार 281 मतदाता पंजीकृत हैं।वहीं, तालेड़ा पंचायत समिति की 40 ग्राम पंचायतों में 402 वार्ड हैं और यहां 1 लाख 22 हजार 402 मतदाता हैं। जिले की 235 ग्राम पंचायतों में करीब 796 मतदान बूथों पर चुनाव कराने की तैयारी है। प्रत्येक बूथ पर पांच कार्मिकों की तैनाती प्रस्तावित है। परिसीमन के बाद अधिकांश बूथों पर 800 से 1,200 मतदाता होने की जानकारी दी गई है।
शिक्षक संगठनों ने प्रक्रिया सरल बनाने की उठाई मांग
मतपत्रों पर प्रत्याशियों के नाम हाथ से लिखने की प्रक्रिया को लेकर शिक्षक संगठनों ने इसे सरल बनाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि लाखों मतपत्रों पर नाम लिखने और उनकी जांच करने में कर्मचारियों का काफी समय लगेगा।ऐसे में मतदान से पहले पर्याप्त समय और स्पष्ट कार्ययोजना उपलब्ध कराना जरूरी है। इससे कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव कम होगा और मतपत्रों में त्रुटियों की आशंका भी घट सकती है। मतदान कार्मिकों को समय पर सामग्री उपलब्ध कराना और काम का उचित बंटवारा करना भी महत्वपूर्ण रहेगा।
नाम लिखने से लेकर गड्डियां बनाने तक कार्मिकों की जिम्मेदारी
निर्वाचन प्रक्रिया के तहत सरपंच और वार्ड पंच के लिए अलग-अलग रंग के मतपत्र दिए जाएंगे। चुनाव चिह्न के सामने संबंधित प्रत्याशी का नाम हाथ से लिखा जाएगा। इसके बाद नामों की जांच कर मतपत्रों को व्यवस्थित किया जाएगा। नोटा सहित निर्धारित विकल्पों की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी।बूंदी की मतपत्र एवं लेखा प्रभारी चित्रा सिंह के अनुसार, पंच और सरपंच चुनाव के लिए 17 लाख 91 हजार 720 मतपत्र छपवाए गए हैं। तीसरे और चौथे चरण के चुनाव की तैयारियां जारी हैं। मतदान कार्मिकों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मतपत्र तैयार करने और चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
5 और 16 नवंबर को होंगे सरपंच-पंच चुनाव
बूंदी जिले में सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए तीसरे चरण में 5 नवंबर और चौथे चरण में 16 नवंबर को मतदान प्रस्तावित है। इससे पहले 3 और 14 नवंबर को जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव होंगे।लगातार चुनावी चरणों के बीच मतदान कार्मिकों के सामने समय पर तैयारी पूरी करने की चुनौती रहेगी। मतपत्रों पर नाम लिखने की प्रक्रिया से लेकर मतदान और मतगणना तक हर चरण में सावधानी जरूरी होगी। अब निर्वाचन विभाग की तैयारियों और कार्मिकों के कामकाज पर नजर रहेगी।