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अलवर जिला प्रमुख चुनाव: कांग्रेस का पुराना दबदबा बरकरार रहेगा या भाजपा बनाएगी बोर्ड? 39 सीटों पर नजर

अलवर: राजस्थान के अलवर जिला परिषद में जिला प्रमुख की कुर्सी को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मुकाबला चर्चा में है। पिछले कई चुनावों से जिला प्रमुख पद पर कांग्रेस का प्रभाव रहा है। अब भाजपा इस सिलसिले को बदलकर जिला परिषद में अपना बोर्ड बनाने की कोशिश कर रही है। नए परिसीमन के बाद परिषद में 49 के बजाय 39 वार्ड रह गए हैं। इस बार जिला प्रमुख का पद अनुसूचित जनजाति (ST) की महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में दोनों दलों को न केवल सीटों का गणित साधना होगा, बल्कि आरक्षण के अनुरूप उम्मीदवार और सदस्यों का समर्थन भी जुटाना होगा।

अलवर जिला प्रमुख की कुर्सी पर भाजपा-कांग्रेस की नजर

अलवर जिला परिषद में जिला प्रमुख का पद जिले की ग्रामीण राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है। भाजपा और कांग्रेस दोनों इस पद पर अपना उम्मीदवार बैठाने की रणनीति बना रही हैं। कांग्रेस अपने पुराने राजनीतिक प्रभाव को बनाए रखना चाहती है, जबकि भाजपा जिला परिषद में बोर्ड बनाने के लिए प्रयासरत है।जिला प्रमुख का चुनाव सीधे जनता नहीं करती। जिला परिषद के निर्वाचित सदस्य अपने बीच से जिला प्रमुख चुनते हैं। इसलिए चुनाव में जीती गई सीटों के साथ सदस्यों का समर्थन और दलों के बीच बनने वाले समीकरण भी महत्वपूर्ण होंगे।

नए परिसीमन के बाद जिला परिषद में 39 वार्ड

नए जिलों के गठन और परिसीमन के बाद अलवर जिला परिषद में वार्डों की संख्या घटकर 39 रह गई है। पहले परिषद में 49 सदस्य थे। इस बदलाव के कारण पुराने चुनाव परिणामों और मौजूदा मुकाबले की सीधी तुलना करना आसान नहीं है।उपलब्ध चुनावी जानकारी के अनुसार, इस बार अलवर जिला प्रमुख का पद अनुसूचित जनजाति की महिला के लिए आरक्षित है। यानी जिला प्रमुख बनने के लिए संबंधित उम्मीदवार का ST वर्ग से महिला होना जरूरी है। इस आरक्षण के कारण दोनों दलों को अपने राजनीतिक समीकरण इसी आधार पर तैयार करने होंगे।

2005 में टीकाराम जूली बने थे जिला प्रमुख

अलवर जिला परिषद के पिछले चुनावों में कांग्रेस का प्रभाव दिखाई देता रहा है। वर्ष 2005 में टीकाराम जूली जिला प्रमुख बने थे। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की वेबसाइट पर भी उनके जिला प्रमुख रहने का कार्यकाल 2005 से 2008 तक दर्ज है। इसके बाद वर्ष 2010 में कांग्रेस की साफिया खान जिला प्रमुख बनीं। वर्ष 2015 में रेखा राजू यादव ने यह पद संभाला। वर्ष 2021 के चुनाव में कांग्रेस के बलबीर छिल्लर जिला प्रमुख चुने गए थे। उन्होंने भाजपा के रामवीर को सात वोटों से हराया था। उस चुनाव में कांग्रेस को 28 और भाजपा को 21 वोट मिले थे।इस तरह पिछले चुनावों में कांग्रेस का प्रभाव बना रहा। अब भाजपा के सामने इस राजनीतिक सिलसिले को बदलने की चुनौती है।

हर चुनाव में सामने आया नया चेहरा

अलवर जिला परिषद के पिछले चुनावों में जिला प्रमुख पद पर अलग-अलग चेहरे सामने आए। हर कार्यकाल में नए व्यक्ति को जिम्मेदारी मिली। आरक्षण और राजनीतिक समीकरणों के कारण भी उम्मीदवारों के चयन में बदलाव होता रहा है।वर्ष 2005 में टीकाराम जूली, 2010 में साफिया खान, 2015 में रेखा राजू यादव और 2021 में बलबीर छिल्लर जिला प्रमुख बने। इन चुनावों से यह भी स्पष्ट होता है कि पद के लिए केवल राजनीतिक प्रभाव ही नहीं, बल्कि उस समय लागू आरक्षण व्यवस्था और निर्वाचित सदस्यों का समर्थन भी अहम रहता है।

वर्ष 2015 में बहुमत के बावजूद बोर्ड बनाने में आई थी चुनौती

वर्ष 2015 के जिला परिषद चुनाव को अलवर की राजनीति में खास तौर पर याद किया जाता है। उस समय भाजपा के पास बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस की रेखा राजू यादव जिला प्रमुख बनी थीं। उस चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं के बीच मतभेद और क्रॉस वोटिंग की चर्चा भी सामने आई थी।यह घटनाक्रम बताता है कि जिला परिषद में सीटों की संख्या महत्वपूर्ण होने के साथ सदस्यों के बीच तालमेल भी जरूरी है। इस बार भी जिला प्रमुख के चुनाव में दलों की रणनीति और निर्वाचित सदस्यों का समर्थन अहम भूमिका निभा सकता है।

2021 में कांग्रेस के बलबीर छिल्लर बने थे जिला प्रमुख

वर्ष 2021 के चुनाव में कांग्रेस के बलबीर छिल्लर जिला प्रमुख चुने गए थे। उन्होंने भाजपा के रामवीर को सात वोटों से हराया था। बाद में बलबीर छिल्लर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। इससे अलवर की जिला परिषद राजनीति में दलगत समीकरण बदले।इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने सदस्यों को एकजुट रखने की चुनौती रहेगी। जिला प्रमुख के चुनाव में क्रॉस वोटिंग की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इसका आकलन चुनाव परिणाम और सदस्यों के रुख के बाद ही किया जा सकेगा।

टीकाराम जूली ने कांग्रेस की जीत का दावा किया

पंचायत चुनाव के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कांग्रेस को बड़ी सफलता मिलने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी को गांवों की सरकार चुनने के चुनाव में अच्छा समर्थन मिल रहा है।दूसरी ओर भाजपा भी जिला परिषद में अपना बोर्ड बनाने की तैयारी कर रही है। दोनों दलों के नेताओं के दावे अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं। अंतिम तस्वीर जिला परिषद की सभी सीटों के परिणाम और जिला प्रमुख के चुनाव के दौरान सदस्यों के समर्थन से ही स्पष्ट होगी।

अब जिला परिषद के नतीजों पर टिकी नजरें

अलवर जिला प्रमुख का चुनाव इस बार पुराने राजनीतिक इतिहास और नए आरक्षण के कारण महत्वपूर्ण हो गया है। कांग्रेस अपने पिछले प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश में है, जबकि भाजपा जिला परिषद में बोर्ड बनाने के लिए समर्थन जुटा रही है।39 वार्डों के परिणाम आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि किस दल के पास कितने सदस्य हैं। इसके बाद ST महिला के लिए आरक्षित जिला प्रमुख पद पर उम्मीदवार के चयन और समर्थन का समीकरण सामने आएगा। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि जिला प्रमुख की कुर्सी किस दल के पास जाएगी।


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