#क्राइम #राज्य-शहर

रायपुर में 80 से अधिक मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई, प्रभावित परिवारों ने उठाए कई सवाल

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान 80 से अधिक मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई विधायक कॉलोनी के लिए भूमि खाली कराने के उद्देश्य से की गई, जबकि प्रभावित परिवारों का आरोप है कि पर्याप्त समय, पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था के बिना उनके आशियाने उजाड़ दिए गए। इस घटना के बाद सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।

सरकारी जमीन खाली कराने के लिए चला बुलडोजर

रायपुर में प्रशासन ने विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए चिन्हित सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया। इस दौरान बुलडोजर की मदद से 80 से अधिक मकानों को हटाया गया। प्रशासन का कहना है कि संबंधित भूमि लंबे समय से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थी और यहां अवैध कब्जे की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद यह कार्रवाई की गई। अभियान के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे ताकि व्यवस्था बनी रहे।

प्रभावित परिवारों ने सरकारी योजनाओं पर उठाए सवाल

कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों ने प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जिन मकानों को अब अवैध बताकर तोड़ा गया, उन्हीं परिवारों को पहले विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिला था। कई लोगों का दावा है कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ दिया गया, जिससे उन्हें अपने मकानों की वैधता का भरोसा था। प्रभावित लोगों का कहना है कि यदि उनके मकान अवैध थे, तो उन्हें सरकारी योजनाओं के दायरे में कैसे शामिल किया गया।

बेघर हुए परिवारों ने पुनर्वास की मांग उठाई

बुलडोजर कार्रवाई के बाद कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं। प्रभावित लोगों का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया और न ही वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की गई। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पुनर्वास की मांग करते हुए कहा कि कार्रवाई से पहले मानवीय पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए था, ताकि लोगों को अचानक बेघर होने की स्थिति का सामना न करना पड़े।

प्रशासन ने कार्रवाई को बताया नियमानुसार

प्रशासन का कहना है कि संबंधित भूमि सरकारी स्वामित्व की है और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लंबे समय से लंबित थी। अधिकारियों के अनुसार, निर्धारित प्रक्रिया के तहत अभियान चलाया गया और सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद पुनर्वास, सरकारी योजनाओं के लाभ और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। अब इस पूरे मामले में सरकार के अगले कदम और प्रभावित परिवारों को मिलने वाली राहत पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *