भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: मां का सरकार को अल्टीमेटम, 8 जुलाई तक कार्रवाई नहीं हुई तो 9 जुलाई से आमरण अनशन
बिहार के भोजपुर जिले में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। मृतक की मां आशा देवी ने आरोपित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए सरकार को 8 जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वह 9 जुलाई से अपने घर के सामने आमरण अनशन शुरू करेंगी।
9 जुलाई से घर के बाहर अनशन पर बैठेंगी आशा देवी
आशा देवी ने बताया कि वह अपने गांव बिलौटी स्थित घर के सामने पेड़ के पास आमरण अनशन शुरू करेंगी। उनका कहना है कि यह अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक मामले में नामजद अधिकारियों और अन्य आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि परिवार लंबे समय से न्याय की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है।
पांच प्रमुख मांगों पर अड़ा परिवार
परिवार ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें मामले में आरोपित अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों की गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच, परिवार की सुरक्षा, जांच की प्रगति से लगातार अवगत कराने तथा गांव के युवकों पर दर्ज कथित फर्जी मुकदमों को वापस लेने की मांग शामिल है। परिजनों का कहना है कि इन मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए।
पुलिस अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
भरत तिवारी की बहन पूजा देवी ने मामले में कई पुलिस अधिकारियों और अन्य संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जांच की प्रत्येक प्रगति की जानकारी उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई।
फर्जी मुकदमों और निगरानी के आरोप
आशा देवी का आरोप है कि घटना के बाद गांव के कई युवकों पर बिना पर्याप्त आधार के मुकदमे दर्ज किए गए हैं। उन्होंने इन मामलों को वापस लेने की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने यह भी दावा किया कि देर रात उनके घर के आसपास बिना नंबर प्लेट वाले वाहन की आवाजाही होती है, जिसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए।
क्या है भरत तिवारी एनकाउंटर मामला?
भरत तिवारी भोजपुर जिले में सामाजिक मुद्दों और बाढ़ प्रभावित लोगों की समस्याओं को लेकर सक्रिय बताए जाते थे। पुलिस कार्रवाई के दौरान वह गोली लगने से घायल हुए थे और बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद सामने आए एक वीडियो और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठे। परिजनों का आरोप है कि भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उन पर गोली चलाई गई। वहीं, पूरे मामले की जांच और पुलिस कार्रवाई को लेकर बहस जारी है।