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भपंग के सुरों को मिला देश का सम्मान: गफरुद्दीन मेवाती को पद्मश्री, युवा पीढ़ी के लिए आवासीय विद्यालय की मांग

अलवर के प्रसिद्ध भपंग वादक गफरुद्दीन मेवाती जोगी को सोमवार को राजधानी दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। इससे पहले 25 जनवरी को भारत सरकार ने उनके नाम की घोषणा की थी।

इस गौरवपूर्ण क्षण के दौरान उनके साथ टेकचंद शर्मा, भूपेंद्र सिंह नरूका, युवा कलाकार शाहरुख खान मेवाती और लोक कथाकार मुफिद सहित कई सहयोगी मौजूद रहे। सम्मान के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ भी समय बिताया।

गफरुद्दीन मेवाती का जीवन संघर्ष और साधना की मिसाल है। बचपन में वे अपने पिता के साथ घर-घर जाकर भजन और पौराणिक दोहे गाकर गुजारा करते थे। वर्ष 1978 में भरतपुर (अब डीग) से अलवर आकर उन्होंने अपनी कला को नई पहचान दी। उनकी प्रतिभा ने देश ही नहीं, विदेशों में भी पहचान बनाई—1992 में पहली बार विदेश में प्रस्तुति दी और 2012 में लंदन में महारानी एलिजाबेथ के जन्मदिन समारोह में भी अपनी कला का प्रदर्शन किया।

उन्होंने इस मौके पर भपंग कला के संरक्षण और विस्तार को लेकर चिंता भी जताई। उनका कहना है कि यदि सरकार आवासीय विद्यालय स्थापित करे और युवाओं को मुफ्त प्रशिक्षण दिया जाए, तो इस पारंपरिक कला को नई पीढ़ी से जोड़ा जा सकता है। साथ ही उन्होंने अपनी आवासीय जरूरतों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।

गफरुद्दीन मेवाती ने भारत सरकार और राजस्थान सरकार का आभार जताते हुए कहा कि वे आज भी विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और ‘ग्राम रथ अभियान’ के माध्यम से गांव-गांव जाकर अपनी कला के जरिए जनजागरूकता फैलाने का कार्य कर रहे हैं।

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