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सरिस्का में खुशियों की दहाड़: बाघिन ST-22 के साथ दिखे दो नन्हे शावक

अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व से एक बार फिर रोमांच से भर देने वाली खबर सामने आई है। जंगल की खामोश वादियों में अब नन्हे कदमों की आहट गूंजने लगी है।

तालवृक्ष रेंज में गश्त कर रही टीम की नजर उस पल ठहर गई, जब बाघिन ST-22 अपने दो नन्हे शावकों के साथ दिखाई दी। महज एक से डेढ़ महीने के ये शावक अपनी मां के साए में जंगल की दुनिया से पहला परिचय ले रहे हैं।

वन विभाग के अनुसार दोनों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनकी हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है। तपती गर्मी को देखते हुए जंगल के जल स्रोतों और वॉटर पॉइंट्स को लगातार भरा जा रहा है, ताकि बाघिन और उसके शावकों को किसी तरह की परेशानी न हो।

अब सरिस्का में बाघों की कुल संख्या बढ़कर 54 हो गई है — जिनमें 11 वयस्क बाघ, 17 बाघिनें और 26 शावक शामिल हैं। यह आंकड़ा न केवल वन विभाग की मेहनत का परिणाम है, बल्कि जंगल के फिर से जीवंत होने की कहानी भी बयां करता है।

मौत से जीवन तक की कहानी

एक वक्त था जब साल 2005 में सरिस्का पूरी तरह बाघ विहीन हो चुका था। शिकारियों ने जंगल की इस शान को खत्म कर दिया था और सन्नाटा छा गया था।

लेकिन फिर उम्मीद ने उड़ान भरी। साल 2008 में रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान से बाघों को ट्रैंक्युलाइज कर हेलीकॉप्टर के जरिए सरिस्का लाया गया। यह प्रयोग ऐतिहासिक साबित हुआ। धीरे-धीरे बाघों की संख्या बढ़ी और जंगल ने फिर से अपनी दहाड़ वापस पा ली।

आज का सरिस्का — उम्मीदों का जंगल

आज सरिस्का न सिर्फ बाघों से आबाद है, बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुका है। यहां अब बाघों की साइटिंग आम होती जा रही है, जो कभी असंभव लगती थी।

ST-22 के इन नन्हे शावकों ने एक बार फिर साबित कर दिया है — सरिस्का अब सिर्फ जंगल नहीं, बल्कि जिंदगी की नई शुरुआत है।

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Stv News Rajasthan

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