दिल्ली हाईकोर्ट से पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को राहत नहीं, दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग खारिज
मध्य प्रदेश के पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिल सकी। अदालत ने धोखाधड़ी मामले में उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के बाद निचली अदालत का निर्णय फिलहाल प्रभावी रहेगा। मामला कथित बैंक रिकॉर्ड में अनियमितता कर अनुचित वित्तीय लाभ लेने से जुड़ा है।
हाईकोर्ट ने राहत देने से किया इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की उस याचिका को स्वीकार नहीं किया, जिसमें उन्होंने अपनी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग की थी। अदालत के इस आदेश के बाद विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि फिलहाल बरकरार रहेगी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर याचिका पर फैसला सुनाया।
धोखाधड़ी के मामले से जुड़ा है पूरा विवाद
यह मामला वर्ष 1998 से 2011 के बीच ग्रामीण विकास बैंक से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का है। जांच एजेंसियों के अनुसार, बैंक रिकॉर्ड में कथित फर्जीवाड़ा कर ब्याज की राशि का अनुचित लाभ लेने का आरोप लगाया गया था। इसी प्रकरण में विशेष सीबीआई अदालत ने राजेंद्र भारती को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष की सजा सुनाई थी। हालांकि, सजा के बाद उन्हें ट्रायल कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
उपचुनाव लड़ने के अधिकार का दिया था तर्क
राजेंद्र भारती ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि यदि उनकी दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई गई तो वह दतिया विधानसभा उपचुनाव नहीं लड़ सकेंगे। उन्होंने अदालत से सजा पर रोक लगाने के साथ-साथ उपचुनाव प्रक्रिया पर भी रोक लगाने का अनुरोध किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह राहत देने से इनकार कर दिया, जिससे चुनाव लड़ने की उनकी संभावनाओं पर असर पड़ सकता है।
दतिया उपचुनाव पर टिकी राजनीतिक नजरें
राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद दतिया सीट पर उपचुनाव घोषित किया गया है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार मतदान 30 जुलाई को होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को की जाएगी। हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद इस सीट का उपचुनाव मध्य प्रदेश की राजनीति में अहम माना जा रहा है, क्योंकि सभी प्रमुख दलों की नजर इस चुनावी मुकाबले पर टिकी हुई है।