बाड़मेर दुष्कर्म केस: 7 वर्षीय बच्ची के मामले में 14 दिन में चालान पेश, त्वरित कार्रवाई से जल्द न्याय की उम्मीद
बाड़मेर में 7 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के चर्चित मामले में पुलिस ने तेज कार्रवाई करते हुए महज 14 दिनों के भीतर आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश कर दिया है। पुलिस का कहना है कि समयबद्ध जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मुकदमे की सुनवाई में तेजी आने और पीड़िता को जल्द न्याय मिलने की उम्मीद है।
14 दिन में पूरी हुई जांच, कोर्ट में पेश हुआ चालान
बाड़मेर पुलिस ने इस संवेदनशील मामले में त्वरित अनुसंधान करते हुए निर्धारित समय के भीतर जांच पूरी कर ली। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नितेश आर्य के अनुसार, 19 जुलाई को सामने आए इस मामले में महिला थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। घटना के दिन ही आरोपी मगसिंह को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद पुलिस ने सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करते हुए मात्र 14 दिनों में न्यायालय में आरोप पत्र (चालान) प्रस्तुत कर दिया। पुलिस का मानना है कि समय पर पेश किए गए चालान से मामले की सुनवाई में तेजी आ सकती है।
साक्ष्य और पीड़िता के बयान के आधार पर जांच पूरी
पुलिस ने अनुसंधान के दौरान पीड़िता के बयान, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, चिकित्सीय एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों का समयबद्ध तरीके से संकलन किया। जांच अधिकारियों ने सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन करते हुए केस डायरी तैयार की और पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चालान दाखिल किया। अधिकारियों का कहना है कि मजबूत साक्ष्य अभियोजन पक्ष के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
घटना के बाद लोगों में आक्रोश
घटना सामने आने के बाद पीड़ित परिवार और विभिन्न सामाजिक संगठनों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। पीड़िता को शीघ्र न्याय दिलाने और आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर आक्रोश रैली भी निकाली गई। प्रदर्शनकारियों ने मामले की त्वरित सुनवाई और कानून के अनुरूप सख्त सजा की मांग की। इस घटना ने क्षेत्र में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चर्चा को जन्म दिया।
बार एसोसिएशन की अपील भी रही चर्चा में
मामले के बाद बाड़मेर बार एसोसिएशन ने अधिवक्ताओं से आरोपी की पैरवी नहीं करने का आग्रह किया था। वहीं, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उसका प्राथमिक उद्देश्य निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करना था। अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया अदालत में चलेगी, जहां उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर फैसला किया जाएगा।