अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड: शरीर पर 41 चोटों के निशान, 36 घंटे बाद भी मुख्य आरोपी फरार
भरतपुर में खनन विवाद के बीच भाजपा के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या के मामले में पुलिस की जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, उनके शरीर पर 41 जगह चोटों के निशान मिले हैं। दोनों हाथों और पैरों में कई फ्रैक्चर होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 14 टीमें गठित की हैं। वहीं, परिवार ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 41 चोटों का जिक्र
राजस्थान के भरतपुर में भाजपा के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या का मामला गंभीर होता जा रहा है। वारदात के करीब 36 घंटे बाद भी मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने की बात सामने आई है। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है।इस बीच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भड़ाना के शरीर पर 41 जगह चोटों के निशान मिलने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके दोनों हाथों और दोनों पैरों में कई जगह फ्रैक्चर थे। सिर पर भारी और नुकीली वस्तु से चोट लगने के कारण हड्डी टूटने की बात भी सामने आई है।रिपोर्ट के अनुसार, अत्यधिक खून बहने से मौत होने की आशंका जताई गई है। शरीर पर गोली लगने के स्पष्ट निशान नहीं मिलने की बात भी कही गई है। हालांकि, उनकी पत्नी कमलेश ने घटना के दौरान गोली चलने की बात कही थी। ऐसे में पुलिस को इस पहलू की भी जांच करनी होगी।
पत्नी ने कमरे में छिपकर बचाई जान
घटना के समय अतर सिंह भड़ाना की पत्नी कमलेश भी मौके पर मौजूद थीं। जानकारी के मुताबिक, हमलावरों से बचने के लिए उन्होंने एक कमरे में छिपकर अपनी जान बचाई।परिवार के अनुसार, कमलेश इस घटनाक्रम की चश्मदीद गवाह हैं। उनके बयान जांच में अहम हो सकते हैं। पुलिस घटना के क्रम, हमलावरों की पहचान और विवाद की पृष्ठभूमि से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
कमरे से बाहर खींचकर हमला करने का आरोप
परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, हमलावरों से बचने के लिए अतर सिंह भड़ाना ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था। आरोप है कि हमलावरों ने उन्हें बाहर निकालने के लिए कमरे की खिड़की में आग लगा दी।इसके बाद दरवाजा तोड़कर उन्हें बाहर खींचने और लाठी-डंडों तथा लोहे की रॉड से हमला करने का आरोप लगाया गया है। परिवार का कहना है कि हमलावरों ने उन पर लगातार वार किए।हालांकि, घटना के पूरे क्रम और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि पुलिस जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
15 दिन पहले जान से मारने की धमकी मिलने का दावा
हत्याकांड से जुड़ा एक अहम पहलू पहले मिली कथित धमकी भी है। जानकारी के अनुसार, वारदात से करीब 15 दिन पहले अतर सिंह भड़ाना को धमकी दी गई थी।आरोप था कि यदि वह क्रेशर प्लांट पर आए, तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। परिवार का दावा है कि बाद में इसी धमकी के अनुरूप हमला किया गया।बताया जा रहा है कि खान तक जाने वाले रास्ते को लेकर स्थानीय लोगों और पूर्व विधायक के बीच विवाद चल रहा था। सरकार की ओर से चारागाह के लिए दूसरी जमीन आवंटित किए जाने के बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ था। पुलिस के लिए अब खनन विवाद और कथित धमकी के बीच संबंध की जांच करना भी महत्वपूर्ण है।
35 नामजद, 50 से 55 अन्य लोगों के खिलाफ मामला
इस मामले में दर्ज एफआईआर में 35 लोगों को नामजद किया गया है। इसके अलावा 50 से 55 अन्य लोगों के खिलाफ भी शिकायत दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। एफआईआर में हमलावरों की संख्या करीब 100 बताई गई है।वारदात के बाद कई आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए 14 टीमें गठित की हैं। करीब एक दर्जन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।हालांकि, मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से जांच पर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस को आरोपियों की पहचान, उनकी भूमिका और वारदात में शामिल लोगों की संख्या की पुष्टि करनी होगी।
क्रेशर प्लांट का DVR नहीं मिलने से जांच में चुनौती
घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज भी जांच का अहम हिस्सा हो सकते हैं। लेकिन अब तक क्रेशर प्लांट के कैमरों की रिकॉर्डिंग पुलिस को नहीं मिलने की जानकारी सामने आई है।बताया जा रहा है कि सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर पूर्व विधायक के परिवार के लोग अपने साथ ले गए हैं। ऐसे में घटनास्थल की रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने से जांच प्रभावित हो सकती है।पुलिस को अब चश्मदीदों के बयान, दूसरे संभावित डिजिटल साक्ष्यों और घटनास्थल से जुटाए गए सबूतों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़नी होंगी। डीवीआर कहां है और उसमें क्या रिकॉर्ड हुआ, यह भी जांच का विषय हो सकता है।
परिवार ने की सीबीआई जांच की मांग
अतर सिंह भड़ाना की हत्या के बाद परिवार ने मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। परिवार का सवाल है कि कथित धमकी मिलने के बावजूद विवाद को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया।परिवार ने आरोपियों की गिरफ्तारी में हो रही देरी पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, सीबीआई जांच की मांग पर संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक रुख सामने आने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
पुलिस जांच और गिरफ्तारी पर टिकी नजर
फिलहाल पुलिस के सामने फरार आरोपियों को पकड़ना और हत्या से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करना बड़ी चुनौती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए चोटों के निशान, पत्नी कमलेश के बयान और कथित धमकी से जुड़े तथ्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।इसके साथ ही खनन विवाद, कथित हमलावरों की संख्या और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग से जुड़े सवालों के जवाब तलाशने होंगे। जांच आगे बढ़ने के साथ ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वारदात में किन लोगों की क्या भूमिका थी।