अलवर के सिद्धार्थ सक्सेना की सफलता चर्चा में, AI स्टार्टअप की डील से एक दिन में 77 करोड़ रुपये मिलने का दावा
राजस्थान के अलवर के युवा टेक उद्यमी सिद्धार्थ सक्सेना इन दिनों सुर्खियों में हैं। उन्होंने दावा किया है कि अपने AI स्टार्टअप में हिस्सेदारी बेचने के बाद उन्हें एक ही दिन में करीब 8 मिलियन डॉलर (लगभग 77 करोड़ रुपये) की राशि प्राप्त हुई। IIT कानपुर से पढ़ाई करने वाले सिद्धार्थ आज सिलिकॉन वैली में AI आधारित स्टार्टअप के जरिए वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
अलवर से सिलिकॉन वैली तक का प्रेरणादायक सफर
26 वर्षीय सिद्धार्थ सक्सेना का संबंध राजस्थान के अलवर से है। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्होंने बेंगलुरु स्थित एक टेक कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और कोडिंग का अनुभव हासिल किया। इसके बाद फिनलैंड और कनाडा में काम करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों पर अपनी विशेषज्ञता विकसित की। यही अनुभव आगे चलकर उन्हें वैश्विक स्टार्टअप इकोसिस्टम तक ले गया और उन्होंने सिलिकॉन वैली में अपनी अलग पहचान बनाई।
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AI स्टार्टअप ‘Merlin’ ने दिलाई वैश्विक पहचान
साल 2022 में सिद्धार्थ सक्सेना ने अपने IIT साथियों प्रग्युश राय और शिरशेंदू सरकार के साथ मिलकर AI आधारित स्टार्टअप Merlin की शुरुआत की। यह एक Chrome Extension है, जिसे कामकाजी पेशेवरों की उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। कंपनी के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म AI की मदद से कंटेंट तैयार करने, रिसर्च, लेखन और अन्य डिजिटल कार्यों को आसान बनाता है। बताया जा रहा है कि स्टार्टअप की वैल्यू 50 मिलियन डॉलर (करीब 415 करोड़ रुपये) से अधिक पहुंच चुकी है।
77 करोड़ रुपये कैसे मिले, समझिए पूरी डील
सिद्धार्थ सक्सेना के अनुसार, उन्हें मिली करीब 77 करोड़ रुपये की राशि वेतन, बोनस या किसी पुरस्कार से नहीं मिली। उनका कहना है कि यह रकम उनके स्टार्टअप में मौजूद व्यक्तिगत हिस्सेदारी (Equity) के एक हिस्से को वैश्विक निवेशकों को बेचने के बाद प्राप्त हुई। स्टार्टअप की दुनिया में इस प्रक्रिया को Founder Secondary Sale कहा जाता है। इसमें कंपनी के संस्थापक अपनी कुछ हिस्सेदारी निवेशकों को हस्तांतरित करते हैं, जबकि कंपनी का संचालन पहले की तरह जारी रहता है।
एक और AI स्टार्टअप के भी हैं सह-संस्थापक
Merlin के अलावा सिद्धार्थ सक्सेना AI क्षेत्र की दूसरी कंपनी Thine के भी सह-संस्थापक हैं, जिसका मुख्यालय अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित पालो ऑल्टो में है। उनका मानना है कि भविष्य AI तकनीक का है और इस क्षेत्र में लगातार नए अवसर सामने आ रहे हैं। सिद्धार्थ ने कई मंचों पर कहा है कि IIT कानपुर के कंप्यूटर साइंस कार्यक्रम में प्रवेश पाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है और इसी दौरान उनकी रुचि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा मशीन लर्निंग में बढ़ी, जिसने उनके करियर की दिशा तय की।
युवाओं को दिया बड़ा संदेश, सोच बदलने पर दिया जोर
सिद्धार्थ सक्सेना का मानना है कि सफल उद्यमी बनने के लिए केवल तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं होता, बल्कि बड़ी सोच और सही निर्णय लेने की क्षमता भी जरूरी है। उनके अनुसार, युवाओं को सीमित दायरे से बाहर निकलकर वैश्विक अवसरों पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी के पास मजबूत विचार, लगातार सीखने की इच्छा और जोखिम उठाने का साहस हो, तो वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सफलता हासिल कर सकता है। यही सोच उन्हें आज भारत के उभरते AI उद्यमियों में अलग पहचान दिला रही है।