अलवर में नकली सरस घी का कारोबार उजागर, 100 किलो संदिग्ध घी जब्त
अलवर। अलवर के केडलगंज में खाद्य विभाग ने नकली घी बेचने के संदेह में कार्रवाई करते हुए करीब 100 किलो घी जब्त किया है। यह घी जयपुर सरस डेयरी के मार्का लगे डिब्बों में बेचा जा रहा था। ग्राहकों को कथित तौर पर 300 रुपये प्रति किलो के भाव से घी बेचे जाने की जानकारी सामने आई है। फूड इंस्पेक्टर केशव चंद्र गोयल के नेतृत्व में टीम ने शिकायतों के आधार पर दुकान पर कार्रवाई की। फिलहाल जब्त घी की गुणवत्ता और उसके स्रोत की जांच की जा रही है।
केडलगंज की दुकान पर खाद्य विभाग की कार्रवाई
अलवर के केडलगंज में संदिग्ध घी की बिक्री को लेकर खाद्य विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों के आधार पर फूड इंस्पेक्टर केशव चंद्र गोयल के नेतृत्व में टीम ने दुकान पर पहुंचकर जांच की। कार्रवाई के दौरान करीब 100 किलो संदिग्ध घी जब्त किया गया। घी जयपुर सरस डेयरी के मार्का लगे डिब्बों में रखा और बेचा जा रहा था। इससे उत्पाद की वास्तविक पहचान और स्रोत को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि, घी के नकली होने की अंतिम पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।
280 रुपये किलो में खरीदकर 300 रुपये में बेचने का दावा
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दुकान पर घी 300 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचा जा रहा था। दुकान के कर्मचारी के मुताबिक, इसे जयपुर से करीब 280 रुपये प्रति किलो की दर से लाया जाता था। इसके बाद ग्राहकों को 300 रुपये प्रति किलो में बेचा जाता था। इस जानकारी के सामने आने के बाद घी की आपूर्ति करने वाले व्यक्ति या कारोबारी की पहचान जांच का अहम हिस्सा बन गई है। फिलहाल, विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि घी कहां तैयार किया जाता था और इसकी सप्लाई किस माध्यम से होती थी।
दो साल से कारोबार चलने की जानकारी
दुकान के कर्मचारी के अनुसार, संदिग्ध घी की बिक्री का यह कारोबार करीब दो साल से चल रहा था। यदि यह जानकारी जांच में सही पाई जाती है, तो लंबे समय तक उत्पाद की आपूर्ति और बिक्री से जुड़े लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। फिलहाल, घी की सप्लाई करने वाले व्यक्ति और कारोबार के पीछे शामिल अन्य लोगों के नामों का खुलासा नहीं हुआ है। खाद्य विभाग उत्पाद के स्रोत और बिक्री से जुड़े तथ्यों की जांच कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही कारोबार के दायरे और जिम्मेदार लोगों के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
सरस डेयरी के मार्का के इस्तेमाल की भी होगी जांच
जब्त घी जयपुर सरस डेयरी के मार्का लगे डिब्बों में बेचे जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि डिब्बों पर लगे मार्का का इस्तेमाल अधिकृत तरीके से हुआ था या नहीं। साथ ही, उत्पाद का निर्माण कहां हुआ और पैकेजिंग किसने की, इसकी भी जांच की जानी है। किसी ब्रांड का मार्का लगा होने से उत्पाद की असलियत प्रमाणित नहीं होती। घी की गुणवत्ता और पैकेजिंग से जुड़े तथ्यों की पुष्टि संबंधित जांच के आधार पर होगी।
जांच रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी घी की गुणवत्ता
खाद्य विभाग ने संदिग्ध घी जब्त कर उसकी गुणवत्ता और स्रोत की जांच शुरू की है। जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि घी निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है या नहीं। इसके साथ ही विभाग को यह भी पता लगाना होगा कि उत्पाद कहां से आया और उसकी बिक्री में किन लोगों की भूमिका रही। रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, घी को संदिग्ध मानकर जांच की जा रही है और उसके नकली होने की अंतिम पुष्टि का इंतजार है।
ग्राहकों को खाद्य उत्पाद खरीदते समय सावधानी जरूरी
इस कार्रवाई के बाद खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और पैकेजिंग को लेकर सतर्कता की जरूरत फिर सामने आई है। ग्राहकों को घी खरीदते समय पैकेट या डिब्बे पर निर्माता का नाम, बैच नंबर, निर्माण और उपयोग की अंतिम तारीख तथा अन्य जरूरी विवरण जांचने चाहिए। असामान्य रूप से कम कीमत पर मिलने वाले उत्पादों के मामले में भी सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि, केवल कम कीमत के आधार पर किसी उत्पाद को नकली नहीं कहा जा सकता। अलवर में जब्त घी की वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।