झारखंड की कविता महतो: हाई जंप में चूकीं, लेकिन हौसला अब भी कायम; साड़ी में दौड़कर जीता था लोगों का दिल
झारखंड के रामगढ़ जिले की कविता महतो की कहानी संघर्ष, जिम्मेदारी और उम्मीद की कहानी है। साड़ी पहनकर नंगे पांव 1600 मीटर की दौड़ पूरी करने का उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। कविता होमगार्ड की नौकरी हासिल कर अपने परिवार को आर्थिक मुश्किलों से बाहर निकालना चाहती थीं। उन्होंने दौड़ का चरण पार कर लिया, लेकिन 25 अक्टूबर को हाई जंप में निर्धारित मानक पूरा नहीं कर सकीं। पति की मौत के बाद दो बच्चों और सास-ससुर की जिम्मेदारी संभाल रहीं कविता के लिए यह नतीजा निराशाजनक रहा। हालांकि, एक भर्ती परीक्षा में असफल होना उनके संघर्ष और मेहनत की अहमियत को कम नहीं करता।
साड़ी में दौड़ने वाली कविता की कहानी क्या है?
झारखंड के रामगढ़ जिले की रहने वाली कविता महतो का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आया, तो लोगों ने उनके जज्बे की सराहना की। साड़ी पहनकर और नंगे पांव दौड़ती कविता के सामने सीमित संसाधन थे, लेकिन अपने परिवार के लिए कुछ कर गुजरने की इच्छा मजबूत थी।कविता की जिंदगी आसान नहीं रही। कभी खेतों में मजदूरी, तो कभी ईंट-भट्ठे पर काम करके वह परिवार की जरूरतें पूरी करती हैं। हर दिन उनके सामने घर चलाने और बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की चुनौती रहती है।उनकी कहानी सिर्फ वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक ऐसी महिला का संघर्ष है, जो मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद अपने लिए रोजगार का बेहतर रास्ता तलाश रही है।
पति की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी कविता पर
कविता के पति का वर्ष 2023 में लंबे समय तक बीमारी से जूझने के बाद निधन हो गया था। पति के इलाज के लिए लिया गया कर्ज परिवार की आर्थिक स्थिति को पहले ही कमजोर कर चुका था।पति की मौत के बाद कविता पर दो बच्चों के साथ सास-ससुर की जिम्मेदारी भी आ गई। परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें लगातार मेहनत करनी पड़ती है।ऐसे हालात में होमगार्ड की नौकरी उनके लिए केवल रोजगार नहीं, बल्कि नियमित आमदनी और परिवार को आर्थिक सहारा देने की उम्मीद थी। इसी उम्मीद ने उन्हें भर्ती की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया।
सुबह पांच बजे उठकर करती थीं दौड़ की तैयारी
कविता इंटरमीडिएट तक पढ़ी हैं। रामगढ़ में होमगार्ड भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई, तो उन्हें लगा कि नौकरी मिलने से परिवार की स्थिति में सुधार हो सकता है।उन्होंने घर के कामकाज और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अभ्यास के लिए समय निकालना शुरू किया। वह सुबह करीब पांच बजे उठकर दौड़ की तैयारी करती थीं। इस दौरान उनकी सास ने भी उनका साथ दिया।सितंबर के आखिरी सप्ताह में कविता को पता चला कि सिद्धो-कान्हू मैदान में एक ट्रेनर की देखरेख में भर्ती के लिए निशुल्क अभ्यास कराया जा रहा है। वह वहां पहुंचीं और अपनी मेहनत से ट्रेनर अंकित अग्रवाल का ध्यान आकर्षित किया।
1600 मीटर की दौड़ पूरी कर बनीं चर्चा का विषय
सीमित संसाधनों के बावजूद कविता ने 1600 मीटर की दौड़ निर्धारित समय से पहले पूरी कर ली। साड़ी पहनकर नंगे पांव दौड़ने की उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।लोगों ने उनके प्रयास की सराहना की। ट्रेनर अंकित अग्रवाल ने भी उनकी लगन को देखते हुए निशुल्क प्रशिक्षण देना शुरू किया। उन्हें दौड़ने के जूते, ट्रैक सूट और जरूरी ट्रेनिंग किट भी उपलब्ध कराई गई।यह मदद कविता के लिए महत्वपूर्ण थी। इससे उन्हें अभ्यास जारी रखने के लिए जरूरी संसाधन मिले। साथ ही, उन्हें यह भरोसा भी मिला कि उनकी मेहनत को पहचानने और सहयोग देने वाले लोग मौजूद हैं।
25 अक्टूबर को हाई जंप में रह गईं पीछे
कविता 25 अक्टूबर को होमगार्ड भर्ती के ट्रायल में शामिल हुईं। उनके लिए यह दिन बेहद अहम था, क्योंकि नौकरी मिलने से परिवार को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद थी।उन्होंने सबसे पहले 1600 मीटर की दौड़ का चरण पार कर लिया। इसके बाद उन्हें हाई जंप की चुनौती पूरी करनी थी।बताई गई जानकारी के अनुसार, हाई जंप के प्रयास के दौरान उनका पैर फिसल गया और वह निर्धारित मानक पार नहीं कर सकीं। इस तरह वह भर्ती के इस चरण में सफल नहीं हो पाईं।कई महीनों की मेहनत के बाद मिले इस नतीजे से कविता भावुक हो गईं। उनके लिए यह केवल एक ट्रायल में मिली असफलता नहीं थी। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने की उम्मीद को भी झटका लगा।
सास फुलको देवी को भी था कविता की सफलता का इंतजार
कविता के घर लौटने पर उनकी सास फुलको देवी और ससुर को भी नतीजे का इंतजार था। परिवार को उम्मीद थी कि होमगार्ड की नौकरी से कविता की मेहनत का फल मिलेगा और घर की आर्थिक परेशानियां कुछ कम होंगी।फुलको देवी अपनी बहू को बेटी की तरह मानती हैं। उन्हें इस बात का दुख है कि मेहनत करने के बावजूद कविता इस बार सफल नहीं हो सकीं।नौकरी नहीं मिलने के बाद कविता को परिवार चलाने के लिए फिर खेतों और ईंट-भट्ठे पर मजदूरी का सहारा लेना पड़ सकता है। फिलहाल उनकी आर्थिक चुनौतियां बनी हुई हैं।
एक परीक्षा की असफलता कविता की मेहनत को छोटा नहीं करती
कविता महतो इस बार होमगार्ड भर्ती के अगले चरण में सफल नहीं हो सकीं। उनकी निराशा स्वाभाविक है, क्योंकि उन्होंने इस अवसर के लिए मेहनत की और परिवार के बेहतर भविष्य की उम्मीद जोड़ी थी।लेकिन किसी एक परीक्षा का परिणाम किसी व्यक्ति की पूरी क्षमता तय नहीं करता। कविता ने कठिन परिस्थितियों में तैयारी की, दौड़ का चरण पार किया और अपने सपने के लिए लगातार प्रयास किया।उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों के लिए प्रशिक्षण, उचित पोषण और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता कितनी महत्वपूर्ण है। समय पर मदद मिलने से प्रतिभाशाली लोगों को अपनी क्षमता दिखाने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
कविता का संघर्ष अभी जारी है
कविता के हाथों में इस बार होमगार्ड की वर्दी नहीं आई, लेकिन उनके आगे बढ़ने की संभावनाएं खत्म नहीं हुई हैं। उन्हें परिवार की जिम्मेदारियां निभानी हैं और अपने बच्चों के भविष्य के लिए प्रयास जारी रखने हैं।साड़ी पहनकर नंगे पांव दौड़ने वाला उनका वीडियो इसलिए लोगों के दिलों तक पहुंचा, क्योंकि उसमें सीमित संसाधनों के बीच कोशिश करती एक मां दिखाई दी। उनकी कहानी का महत्व केवल भर्ती में सफलता या असफलता से तय नहीं होता।कविता महतो की यात्रा याद दिलाती है कि मंजिल तक न पहुंच पाने से सफर की अहमियत खत्म नहीं होती। इस बार उन्हें निराशा जरूर मिली है, लेकिन उनका संघर्ष और परिवार के लिए बेहतर जीवन बनाने की कोशिश अब भी उनकी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।