राजस्थान में खाद्य सुरक्षा योजना के लाभार्थियों का सर्वे, 224 वार्डों पर सरकार की नजर; अजमेर में 5 को नोटिस
अजमेर: राजस्थान में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA) के तहत मुफ्त राशन लेने वाले परिवारों की पात्रता की जांच शुरू हो गई है। प्रदेशभर में अधिक लाभार्थियों वाले 224 वार्ड चिह्नित किए गए हैं। इन क्षेत्रों में सर्वे कर यह पता लगाया जा रहा है कि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच रहा है या नहीं। अजमेर जिले में सरवाड़ के तीन, पुष्कर के एक और टांटोटी के एक वार्ड को जांच के लिए चुना गया है। जिला रसद अधिकारी के अनुसार, पांच लाभार्थियों को नोटिस जारी किए गए हैं। सर्वे में अपात्र पाए जाने वाले परिवारों को योजना से बाहर किया जा सकता है।
70 से 80 फीसदी लाभार्थियों वाले वार्डों पर विशेष नजर
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत बड़ी संख्या में लाभार्थियों वाले वार्डों को प्राथमिकता से जांच के लिए चुना गया है। ऐसे वार्ड, जहां 70 से 80 प्रतिशत या इससे अधिक आबादी योजना से जुड़ी है, वहां पात्रता का सत्यापन किया जा रहा है।सर्वे का उद्देश्य यह पता लगाना है कि मुफ्त खाद्यान्न का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को मिल रहा है या आर्थिक रूप से सक्षम परिवार भी योजना का फायदा उठा रहे हैं। इसके लिए परिवारों की आर्थिक स्थिति और निर्धारित पात्रता मानकों की जांच की जा रही है।
अजमेर के पांच वार्ड सर्वे में शामिल
अजमेर जिले में कुल पांच वार्डों को सर्वे के लिए चिह्नित किया गया है। इनमें सरवाड़ के तीन वार्ड और पुष्कर तथा टांटोटी का एक-एक वार्ड शामिल है।इन क्षेत्रों में प्रवर्तन अधिकारियों और निरीक्षकों के माध्यम से लाभार्थियों की पात्रता की जांच की जा रही है। अधिकारियों की टीम परिवारों की स्थिति और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर जानकारी जुटा रही है।
एक दर्जन से ज्यादा लाभार्थी चिह्नित, पांच को नोटिस
जिले में सर्वे के दौरान अब तक एक दर्जन से अधिक लाभार्थियों को चिह्नित किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, जिला रसद अधिकारी के अनुसार, पांच लाभार्थियों को नोटिस जारी किए गए हैं।नोटिस के जरिए संबंधित परिवारों को अपनी पात्रता के संबंध में जवाब देने और योजना से स्वेच्छा से नाम हटवाने का अवसर दिया गया है। दस्तावेजों और जवाब की जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
प्रदेश के 224 वार्डों में होगी पात्रता की जांच
खाद्य सुरक्षा योजना के लाभार्थियों की जांच केवल अजमेर जिले तक सीमित नहीं है। प्रदेशभर में ऐसे 224 वार्ड चिह्नित किए गए हैं, जहां योजना से जुड़े लोगों का अनुपात अधिक है।इन वार्डों में सर्वे के जरिए वास्तविक पात्र परिवारों और निर्धारित मापदंडों पर खरे नहीं उतरने वाले लाभार्थियों की पहचान की जाएगी। जांच का उद्देश्य योजना के लाभ को सही लोगों तक पहुंचाना है।
क्या पक्का मकान होने पर बंद हो जाएगा मुफ्त राशन?
योजना की पात्रता को लेकर एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। केवल पक्का मकान होने से किसी परिवार को स्वतः अपात्र घोषित नहीं किया जा सकता। परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति और सरकार की ओर से निर्धारित अपवर्जन मानकों के आधार पर पात्रता तय होती है।इसलिए सर्वे में किसी परिवार को अपात्र पाए जाने से पहले संबंधित दस्तावेजों और निर्धारित नियमों की जांच जरूरी होगी। अंतिम निर्णय जांच और विभागीय प्रक्रिया के आधार पर ही लिया जाएगा।
जरूरतमंद परिवारों का राशन सुरक्षित रखना भी चुनौती
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। ऐसे में अपात्र लाभार्थियों की पहचान के साथ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों का लाभ सुरक्षित रखना भी जरूरी है।सर्वे के दौरान परिवार की आय, आर्थिक स्थिति और पात्रता से जुड़े दस्तावेजों का सही आकलन महत्वपूर्ण होगा। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि योजना का लाभ उन्हीं परिवारों तक पहुंचे, जिन्हें इसकी वास्तव में जरूरत है।
जिला रसद अधिकारी ने क्या कहा?
जिला रसद अधिकारी (द्वितीय) नीरज जैन के अनुसार, जिले के पांच वार्डों में प्रवर्तन अधिकारियों और निरीक्षकों के जरिए सर्वे कराया जा रहा है। जांच के दौरान अपात्रता की आशंका वाले लाभार्थियों को चिह्नित किया गया है और पांच लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।उन्होंने बताया कि नोटिस के माध्यम से संबंधित लाभार्थियों को योजना से नाम हटवाने के लिए सरेंडर का अवसर दिया गया है। जवाब और दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।