जयपुर:10 साल तक चला फर्जी डिग्री का साम्राज्य, 200 करोड़ की कमाई… आखिरकार मास्टरमाइंड दबोचा गया
राजस्थान और यूपी की दो प्राइवेट यूनिवर्सिटियों के नाम पर चल रहा करोड़ों का फर्जीवाड़ा आखिर कानून के शिकंजे में आ गया। हजारों बेरोजगार युवाओं के सपनों पर डाका डालने वाला यह रैकेट किस तरह चलता था और कैसे एसओजी ने इसकी परतें खोलीं—पूरा मामला नीचे विस्तार से।
मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी
नोएडा से पकड़ा गया 25 हजार का इनामी ‘डिग्री डॉन’
राजस्थान एसओजी ने 10 साल से फरार चल रहे रवि कुमार उर्फ रवि त्यागी (38) को नोएडा से गिरफ्तार किया। आरोपी ओपीजेएस यूनिवर्सिटी (चूरू) और JS यूनिवर्सिटी (शिकोहाबाद) के नाम पर फर्जी डिग्रियां बेचने का सबसे बड़ा खिलाड़ी था। उस पर 25 हजार का इनाम घोषित था।
10 वर्षों में 5,000 से अधिक डिग्रियां बेचने का खुलासा
3 से 5 लाख में एलएलबी, एलएलएम की ‘फर्जी पढ़ाई’, कमाई 200 करोड़ से ऊपर
जांच में सामने आया कि रवि 2014 से 2024 के बीच 5,000 से अधिक फर्जी डिग्रियां बेच चुका था। प्रति डिग्री वह 3 से 5 लाख रुपये वसूलता था और कुल कमाई 200 करोड़ रुपए से ज्यादा तक पहुंच चुकी थी।
सबसे चिंताजनक तथ्य—कई ऐसे लोगों को प्रोफेशनल डिग्रियां मिलीं जो कभी कॉलेज कैंपस में दाखिल तक नहीं हुए।
कैसे पकड़ में आया पूरा रैकेट?
शारीरिक शिक्षा भर्ती में बैक-डेट की डिग्री ने खोली पोल
2024 में शारीरिक शिक्षा भर्ती परीक्षा के दौरान ओपीजेएस की बैक-डेटेड डिग्रियां सामने आने पर एसओजी को शक हुआ। इसके बाद रवि त्यागी भूमिगत हो गया, लेकिन एडिशनल एसपी धर्माराम गिला और एएसपी हरि प्रसाद सोनी की टीम ने लगातार ट्रैकिंग के बाद उसे नोएडा से पकड़ लिया।
अब तक चांसलर, संचालक और पूर्व रजिस्ट्रार सहित कुल 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
यूनिवर्सिटी में व्याख्याता बनकर बैठा था रैकेट चलाने वाला
2014 से 2024 तक दोनों यूनिवर्सिटियों का ‘इनसाइड ऑपरेटर’
रवि त्यागी सिर्फ बाहर से डील नहीं करता था, बल्कि खुद दोनों यूनिवर्सिटियों में व्याख्याता बनकर नियुक्त था।
2014–2019 : ओपीजेएस यूनिवर्सिटी
2020–2024 : JS यूनिवर्सिटी
असल काम छात्रों और अभ्यर्थियों को फर्जी डिग्री व मार्कशीट उपलब्ध कराना था। पूरा भुगतान वह नकद लेता था ताकि ट्रांजेक्शन का कोई रिकॉर्ड नहीं बचे।
राजस्थान की बड़ी भर्ती प्रक्रियाओं को बनाया निशाना
2019–2023 की 2.50 लाख पदों वाली भर्तियों में बेची गईं हजारों डिग्रियां
राजस्थान में 2019 से 2023 के बीच निकली कई मेगा भर्तियां इस रैकेट की मुख्य टारगेट बनीं।
मुख्य भर्तियां—
पीटीआई : 5546 पद
>कंप्यूटर अनुदेशक : 10,000 पद
>वरिष्ठ अध्यापक : 9760 पद
>CET स्नातक : 3000 पद
>लाइब्रेरियन : 460 पद
>स्कूल व्याख्याता : 6000 पद
>CHO : 3531 पद
साथ ही वन रक्षक, पुलिस कांस्टेबल व अन्य मिलाकर कुल 2.5 लाख से अधिक पद
इन परीक्षाओं में बड़े पैमानें पर फर्जी डिग्रियों की सप्लाई हुई, जिससे पूरा शिक्षण और भर्ती तंत्र सवालों में आ गया।
पूरा रैकेट कितना खतरनाक था?
योग्यता बिना ही कानून और शिक्षा क्षेत्र में प्रवेश
एलएलबी, एलएलएम जैसी डिग्रियां ऐसे लोगों को मिल गईं जिनकी शैक्षणिक योग्यता शून्य थी। यह न सिर्फ भर्ती प्रक्रियाओं के लिए खतरा है, बल्कि न्याय व्यवस्था, शिक्षा तंत्र और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता पर बड़ा हमला भी है।
सालों से बेखौफ चल रहा डिग्री माफिया अब सलाखों के पीछे, लेकिन जांच अभी लंबी
रवि त्यागी की गिरफ्तारी इस बड़े डिग्री स्कैम का महत्वपूर्ण मोड़ है, लेकिन जांच एजेंसियों के अनुसार अभी फर्जीवाड़े की परतें खुलना बाकी हैं। हजारों डिग्रियों की सत्यापन प्रक्रिया भी शुरू हुई है, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।