#सोशल

थाईलैंड में नौकरी का झांसा देकर म्यांमार में बंधक, उदयपुर के महेंद्र सिंह राठौड़ ने सुनाई आपबीती

उदयपुर। विदेश में नौकरी कर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना उदयपुर के एक युवक के लिए बेहद भयावह अनुभव में बदल गया। बांसड़ा खेरोदा निवासी 32 वर्षीय महेंद्र सिंह राठौड़ का दावा है कि उसे थाईलैंड में नौकरी दिलाने का झांसा देकर म्यांमार के एक कथित साइबर स्कैम सेंटर में बंधक बना लिया गया।महेंद्र के अनुसार, उसे थाईलैंड की एक चॉकलेट कंपनी में नौकरी दिलाने की बात कही गई थी। वह मुंबई और चेन्नई होते हुए बैंकॉक पहुंचा। आरोप है कि बैंकॉक पहुंचने के बाद उसे थाईलैंड सीमा के पास से अवैध तरीके से म्यांमार ले जाया गया। वहां उसका पासपोर्ट और मोबाइल छीन लिया गया।पीड़ित का दावा है कि उसे जंगल के अंदर बने एक सेंटर में रखा गया। बंदूक दिखाकर साइबर ठगी करने के लिए मजबूर किया गया। काम करने से इनकार करने पर कथित तौर पर मारपीट और परिवार से पैसे मंगाने का दबाव बनाया गया। परिवार ने करीब 12 लाख रुपए देकर उसे वहां से छुड़ाया।

दुबई में पहचान के बाद मिला नौकरी का ऑफर

महेंद्र के अनुसार, विदेश में नौकरी की तलाश के दौरान दुबई में उसकी कुछ लोगों से पहचान हुई थी। इसी संपर्क के जरिए उसे थाईलैंड की एक चॉकलेट कंपनी में नौकरी का ऑफर दिया गया।ऑफर मिलने के बाद उसने विदेश जाने की तैयारी शुरू की। महेंद्र का कहना है कि उसे शुरुआत में इस बात का अंदाजा नहीं था कि नौकरी के पीछे कोई साइबर अपराध नेटवर्क हो सकता है।29 अगस्त से संबंधित लोगों के संपर्क में रहने के बाद उसे मुंबई बुलाया गया। इसके बाद 30 अगस्त को उसे चेन्नई भेजा गया। वहां एयरपोर्ट के बाहर राहुल नाम का युवक मिला।महेंद्र के अनुसार, उससे अलग-अलग समय पर 30 हजार और 54 हजार रुपए ऑनलाइन लिए गए। इसके बाद उसे बैंकॉक भेज दिया गया।

बैंकॉक पहुंचने के बाद बदला पूरा रास्ता

महेंद्र का दावा है कि बैंकॉक पहुंचने के बाद उसे सामान्य नौकरी की जगह दूसरे रास्ते पर ले जाया गया। वहां से उसे कार के जरिए करीब 200 किलोमीटर दूर ले जाया गया।रास्ते में कई बार वाहन बदले गए। उसके साथ बेंगलुरु का कार्तिक और लावण्या नाम की युवती भी थी। महेंद्र के मुताबिक, थाईलैंड की सीमा के पास पहुंचने के बाद उन्हें नाव के जरिए नदी पार कराई गई।नदी पार करने के बाद वे म्यांमार की सीमा में पहुंच गए। इसके बाद दो दिन तक अलग-अलग स्थानों से होते हुए उन्हें माइसोट ले जाया गया।महेंद्र के अनुसार, वहां से नियति गांव के पास जंगल में करीब 10 किलोमीटर अंदर बने एक सेंटर तक ले जाया गया।

पासपोर्ट और मोबाइल छीनकर बनाया बंधक

महेंद्र के मुताबिक म्यांमार पहुंचने के बाद उसका पासपोर्ट और मोबाइल फोन ले लिया गया। इसके बाद उसे सेंटर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई।पीड़ित का दावा है कि सेंटर में मौजूद लोगों के पास हथियार थे। वहां रहने वाले लोगों को उनकी इच्छा के खिलाफ काम करने के लिए मजबूर किया जाता था।महेंद्र के अनुसार, उसे बताया गया कि उसे साइबर स्कैम का काम करना होगा। नौकरी से जुड़े जिस काम का वादा किया गया था, उसकी जगह उससे ऑनलाइन लोगों को ठगने के लिए कहा गया।

फेसबुक और मैट्रिमोनियल साइट्स से लोगों को फंसाने का आरोप

महेंद्र ने आरोप लगाया कि सेंटर में फेसबुक, इंस्टाग्राम और मैट्रिमोनियल साइट्स के जरिए लोगों से संपर्क कराया जाता था।उसके मुताबिक, खासतौर पर भारत और अमेरिका की महिलाओं से ऑनलाइन बातचीत करने और उन्हें अलग-अलग तरीकों से पैसे भेजने के लिए तैयार करने को कहा जाता था।पीड़ित ने बताया कि यह काम करने से इनकार करने पर उसके साथ मारपीट की गई। उसने आरोप लगाया कि उसे करीब पांच दिन तक एक कमरे में बंद रखा गया।खाना और पानी पर्याप्त नहीं मिलने के कारण उसकी तबीयत बिगड़ गई। महेंद्र के अनुसार एक समय वह बेहोश भी हो गया था।

काम से इनकार किया तो परिवार से पैसे मंगाने का दबाव

महेंद्र का दावा है कि जब उसने साइबर ठगी करने से इनकार किया तो आरोपियों ने उस पर परिवार से पैसे मंगाने का दबाव बनाया।परिवार को उसकी स्थिति की जानकारी मिलने के बाद उसे छुड़ाने के प्रयास शुरू किए गए। महेंद्र के अनुसार, परिवार ने करीब 12 लाख रुपए देकर उसकी रिहाई कराई।इसके बाद 21 सितंबर को उसे माइसोट बस स्टैंड के पास छोड़ दिया गया। वहां से परिवार ने उसके लिए फ्लाइट का टिकट कराया।महेंद्र इसके बाद भारत लौट आया और मुंबई पहुंचा।

भारत लौटने के बाद पुलिस और एजेंसियों से संपर्क

भारत लौटने के बाद महेंद्र ने पूरे मामले की जानकारी पुलिस और संबंधित एजेंसियों को दी। उसने गोपनीय शाखा को भी अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी।पीड़ित के बयान के आधार पर अब इस पूरे नेटवर्क की जांच की जरूरत सामने आ रही है। खास तौर पर यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि नौकरी के नाम पर युवाओं को विदेश भेजने वाले लोग कौन हैं और उनका म्यांमार के साइबर स्कैम नेटवर्क से क्या संबंध है।

महेंद्र के अनुसार कई भारतीय अभी भी फंसे

महेंद्र ने दावा किया कि वह अकेला भारतीय नहीं था जिसे इस नेटवर्क में फंसाया गया। उसके अनुसार बेंगलुरु का कार्तिक सुंदरम, मुंबई के तीन लोग और ब्यावर का एक युवक अब भी वहां फंसे हो सकते हैं।

महेंद्र का कहना है कि उसके संपर्क में आए पांच-छह परिवारों ने भी अपने परिजनों के म्यांमार में होने की जानकारी दी है।

यदि ये दावे सही पाए जाते हैं तो मामला केवल एक युवक के साथ कथित धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहेगा। इससे विदेश में नौकरी के नाम पर भारतीय युवाओं को साइबर अपराध नेटवर्क में धकेले जाने का बड़ा सवाल सामने आता है।

नौकरी के नाम पर विदेश जाने वालों के लिए बड़ा सबक

इस घटना ने विदेश में नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। विदेश में नौकरी का ऑफर मिलने पर कंपनी, एजेंट, वीजा और रोजगार की पूरी प्रक्रिया की जांच जरूरी है।किसी अनजान व्यक्ति को बड़ी रकम ऑनलाइन भेजने से पहले उसके बारे में सत्यापन करना जरूरी है। इसी तरह केवल सोशल मीडिया संपर्क के आधार पर विदेश में नौकरी के लिए यात्रा करना जोखिम भरा हो सकता है।म्यांमार और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों से ऑनलाइन स्कैम सेंटरों में लोगों को जबरन काम कराने की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में विदेश जाने से पहले संबंधित भारतीय दूतावास और सरकारी एजेंसियों से जानकारी लेना महत्वपूर्ण है।

महेंद्र की आपबीती ने खोली कथित नेटवर्क की परतें

महेंद्र सिंह राठौड़ की आपबीती में नौकरी के झांसे से लेकर सीमा पार ले जाने, दस्तावेज छीनने और कथित साइबर ठगी कराने तक की पूरी कहानी सामने आती है।परिवार ने रकम देकर उसे वापस भारत लाया, लेकिन महेंद्र के दावे के अनुसार कई अन्य भारतीय अब भी ऐसे नेटवर्क में फंसे हो सकते हैं।अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस कथित नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं, युवाओं को नौकरी के नाम पर कैसे फंसाया जाता है और उन्हें म्यांमार तक कैसे पहुंचाया जाता है।

author avatar
Stv News Rajasthan

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *