#क्राइम #राज्य-शहर

अजमेर में रेलवे अफसर का अपहरण, 51 लाख की फिरौती मांगी; पत्नी का भाई निकला कथित मास्टरमाइंड

अजमेर। रेलवे भर्ती बोर्ड के मुख्य कार्यालय अधीक्षक रवि कुमार मीणा के अपहरण मामले में अजमेर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। सिविल लाइंस थाना पुलिस ने कथित मुख्य साजिशकर्ता समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, रवि की पत्नी के भाई महेंद्र मीणा ने अपने साथियों के साथ मिलकर अपहरण की साजिश रची थी।पुलिस का आरोप है कि 21 अगस्त को रवि मीणा को रेलवे भर्ती बोर्ड कार्यालय के बाहर से अगवा किया गया। इसके बाद उन्हें अलग-अलग स्थानों पर बंधक बनाकर रखा गया। आरोपियों ने उनकी मां से 51 लाख रुपए की फिरौती मांगी थी। पुलिस ने तकनीकी जांच, सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय पुलिस के सहयोग से 24 अगस्त को रवि को सकुशल मुक्त कराया था।अब मामले में लंबे समय से फरार चल रहे महेंद्र मीणा, अनिल और शंकरलाल को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस तीनों से पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है।

पत्नी के भाई पर साजिश रचने का आरोप

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार महेंद्र मीणा पीड़ित रवि कुमार मीणा की पत्नी का भाई है। जांच में सामने आया कि दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। पुलिस का कहना है कि इसी पारिवारिक विवाद को लेकर महेंद्र ने अपने साथियों के साथ मिलकर अपहरण की योजना बनाई।रिपोर्टों के अनुसार रवि और उनकी पत्नी के बीच विवाद का मामला पहले से चल रहा था। इसी विवाद को खत्म करने या कथित सेटलमेंट के लिए 51 लाख रुपए की मांग किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सामने आए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

21 अगस्त को ऑफिस के बाहर से हुआ अपहरण

पुलिस के मुताबिक 21 अगस्त की शाम रवि मीणा रेलवे भर्ती बोर्ड कार्यालय से निकले थे। इसके बाद वह अपने निर्धारित स्थान तक नहीं पहुंचे। परिवार को जब उनके नहीं पहुंचने की जानकारी मिली तो चिंता बढ़ गई।रवि की मां ने सिविल लाइंस थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की। शुरुआती जांच में पुलिस को रवि के ससुराल पक्ष के कुछ लोगों पर संदेह की जानकारी भी मिली थी।जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने अपहरण से जुड़े वाहन और संदिग्ध लोगों की गतिविधियों को ट्रैक करना शुरू किया।

कार से टक्कर मारकर अगवा करने का आरोप

जांच के दौरान रवि मीणा ने पुलिस को घटना से जुड़ी जानकारी दी। उनके अनुसार, वह कार्यालय से बाइक पर निकले थे। इसी दौरान एक कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।रवि के अनुसार कार में मौजूद लोगों ने उन्हें जबरन वाहन में बैठा लिया। इसके बाद उन्हें अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया। पुलिस जांच में भी यह सामने आया कि अपहरणकर्ताओं ने रवि को कई जगहों पर रखने की कोशिश की थी।कुछ रिपोर्टों के मुताबिक आरोपियों ने रवि को यह भी बताया कि अपहरण की योजना उनके साले महेंद्र के कहने पर बनाई गई थी। पुलिस अब इस दावे और घटना में शामिल सभी लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

51 लाख रुपए की फिरौती मांगने का आरोप

अपहरण के बाद आरोपियों ने रवि के परिवार से 51 लाख रुपए की मांग की। पुलिस के अनुसार, रवि को बंधक बनाकर उनकी मां से रकम की व्यवस्था करने के लिए कहा गया।जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर रवि पर रकम की व्यवस्था कराने का दबाव बनाया। परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना संभव नहीं था। इसी बीच पुलिस ने तकनीकी जांच तेज कर दी।मामले की गंभीरता को देखते हुए अजमेर पुलिस ने अलग-अलग टीमों को सक्रिय किया।

100 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली

पुलिस ने रवि की तलाश में अजमेर से बाहर जाने वाले रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने 100 से ज्यादा कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच की। कुछ अन्य रिपोर्टों में यह संख्या 130 से अधिक बताई गई है।सीसीटीवी फुटेज से संदिग्ध वाहन की गतिविधियों का पता लगाने में मदद मिली। इसके साथ ही पुलिस के साइबर सेल ने मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल से जुड़े तकनीकी इनपुट भी खंगाले।जांच में रवि की लोकेशन दौसा जिले के बांदीकुई, दौसा सदर और आसपास के इलाकों से जुड़ती गई।

दौसा और अलवर पुलिस से भी लिया सहयोग

मामले की जांच केवल अजमेर तक सीमित नहीं रही। रवि की लोकेशन और आरोपियों की गतिविधियों को देखते हुए सिविल लाइंस पुलिस ने दौसा और अलवर पुलिस से संपर्क किया।बांदीकुई थाना, दौसा सदर थाना और अलवर के टहला थाना क्षेत्र में भी पुलिस टीमों ने आरोपियों की तलाश में कार्रवाई की। अलग-अलग टीमों के बीच लगातार जानकारी साझा की गई।पुलिस की बढ़ती सक्रियता के बाद आरोपियों पर दबाव बढ़ता गया। इसी दौरान रवि को लेकर आरोपी बांदीकुई क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे।

पुलिस की गाड़ी देखकर रवि को छोड़कर भागे आरोपी

जांच के अनुसार आरोपियों को जब पुलिस की गतिविधियों का अंदाजा हुआ तो उन्होंने रवि को बांदीकुई के पास छोड़ दिया और मौके से फरार हो गए।सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने रवि को सुरक्षित बरामद किया। इसके बाद उन्हें अजमेर लाया गया। पुलिस ने उनकी स्थिति और घटना से जुड़ी जानकारी हासिल की।रवि के सकुशल मिलने से परिवार ने राहत की सांस ली। इसके बाद पुलिस ने अपहरण की पूरी साजिश में शामिल लोगों की तलाश तेज कर दी।

कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कराने की भी जांच

मामले की जांच में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार आरोपियों ने रवि से कथित तौर पर ऐसा शपथपत्र लिखवाने की कोशिश की, जिसमें यह दिखाया जा सके कि वह अपनी मर्जी से आरोपियों के साथ गए थे और 51 लाख रुपए देने के लिए सहमत थे।पुलिस इस दस्तावेज और उसकी परिस्थितियों की भी जांच कर रही है। यदि जांच में यह बात प्रमाणित होती है तो यह अपहरण की साजिश को छिपाने के प्रयास के रूप में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है।

पहले दो आरोपियों की गिरफ्तारी, अब तीन और पकड़े

पुलिस ने मामले की शुरुआती जांच में कुछ आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। बाद में कथित मुख्य साजिशकर्ता महेंद्र मीणा और उसके साथी अनिल तथा शंकरलाल पुलिस की पकड़ में आए।उपलब्ध जानकारी के अनुसार तीनों आरोपियों को दौसा से गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब उनसे पूछताछ कर रही है। पूछताछ का मुख्य फोकस अपहरण की योजना, फिरौती की रकम, पीड़ित को अलग-अलग स्थानों पर रखने और घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका पर है।

2018 में हुई थी शादी, इसके बाद शुरू हुआ विवाद

पुलिस के अनुसार रवि मीणा और महेंद्र की बहन की शादी वर्ष 2018 में हुई थी। शादी के बाद दोनों परिवारों के बीच विवाद शुरू हो गया था।विवाद को सुलझाने के लिए सामाजिक स्तर पर कई बार बातचीत और बैठकें भी हुईं। लेकिन पुलिस के अनुसार विवाद का स्थायी समाधान नहीं हो पाया।इसी पारिवारिक विवाद को अपहरण की साजिश की कथित वजह माना जा रहा है। हालांकि पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि घटना के पीछे केवल पारिवारिक विवाद था या फिर इसके साथ कोई अन्य आर्थिक कारण भी जुड़ा था।

कोर्ट ने आरोपियों को पुलिस रिमांड पर भेजा

गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को अदालत में पेश किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अनिल को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया, जबकि महेंद्र मीणा और शंकरलाल को पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर लिया गया है।रिमांड के दौरान पुलिस आरोपियों से घटना के पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाएगी। इसके अलावा अपहरण में इस्तेमाल वाहन, संभावित ठिकानों और अन्य सहयोगियों के बारे में भी पूछताछ की जा रही है।

पुलिस अब तलाश रही है पूरी साजिश की कड़ियां

सिविल लाइंस थाना पुलिस की जांच अब केवल तीन गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अपहरण की योजना कब बनाई गई और इसमें कितने लोगों को शामिल किया गया था।इसके अलावा 51 लाख रुपए की फिरौती की रकम का निर्धारण कैसे हुआ, इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस आरोपियों के मोबाइल रिकॉर्ड, संपर्कों और घटनास्थल से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों को भी खंगाल रही है।अपहरण के दौरान रवि को किन-किन स्थानों पर रखा गया और किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी, इसका भी पता लगाया जा रहा है।

परिवार के विवाद से अपहरण तक पहुंचा मामला

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पुलिस के अनुसार अपहरण की साजिश कथित तौर पर पीड़ित के अपने साले ने रची। पारिवारिक विवाद के बीच 51 लाख रुपए की फिरौती की मांग ने मामले को और गंभीर बना दिया।अजमेर पुलिस की जांच में सीसीटीवी, मोबाइल लोकेशन और अलग-अलग जिलों की पुलिस के समन्वय की भूमिका सामने आई है। फिलहाल तीन नए आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ रही है।अब पुलिस की कोशिश इस कथित अपहरण की पूरी साजिश का खुलासा करने और इसमें शामिल हर व्यक्ति की भूमिका तय करने की है।

author avatar
Stv News Rajasthan

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *