273 KM दंडवत यात्रा पर निकलीं रेणु हरिवंशी, 9 साल से अन्न का त्याग
हरियाणा के झज्जर जिले की रेणु हरिवंशी इन दिनों अपनी अनोखी भक्ति को लेकर चर्चा में हैं। सुबाणा गांव की रहने वाली रेणु बाबा खाटूश्याम के दर्शन के लिए 273 किलोमीटर की दंडवत यात्रा पर निकली हैं। शरीर को जमीन पर दंडवत करते हुए वह धीरे-धीरे अपनी मंजिल की ओर बढ़ रही हैं। रास्ते में थकान और घुटनों में दर्द के बावजूद उन्होंने यात्रा जारी रखने का संकल्प लिया है। रेणु ने 5 जुलाई को यह यात्रा शुरू की थी। उनके साथ करीब 15 लोग भी चल रहे हैं, जो यात्रा के दौरान उनका सहयोग कर रहे हैं।
बिना गद्दे के दंडवत यात्रा का संकल्प
रेणु हरिवंशी ने इस बार अपनी यात्रा को लेकर खास संकल्प लिया है। वह बिना गद्दे के ही पूरी दूरी दंडवत करते हुए तय कर रही हैं। वह घुटनों के बल चलने के बजाय पूरे शरीर को जमीन पर लिटाकर दंडवत करती हैं और फिर उठकर कुछ दूरी आगे बढ़ती हैं। इसी तरह लगातार दोहराते हुए वह खाटूश्यामजी की ओर बढ़ रही हैं। उनका लक्ष्य बाबा श्याम के मंदिर पहुंचकर दर्शन करना और दरबार में माथा टेकना है। यात्रा के दौरान उनके साथ चल रहे लोग जरूरत के मुताबिक सहयोग कर रहे हैं।
2018 में छोड़ा अन्न, नारियल पानी का करती हैं सेवन
रेणु की भक्ति और संकल्प की कहानी सिर्फ दंडवत यात्रा तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, उन्होंने वर्ष 2018 में अन्न का त्याग कर दिया था। वह करीब नौ वर्षों से अन्न नहीं खा रही हैं और नारियल पानी का सेवन करती हैं। इसी दौरान उन्होंने एएनएम की नौकरी भी छोड़ दी। उनके पति सिद्धार्थ मल्हान सहकारी बैंक में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। रेणु का कहना है कि उन्होंने अपना जीवन सेवा और आस्था के लिए समर्पित किया है।
गौ सेवा और जनकल्याण का संदेश
रेणु अपनी धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक संदेश को भी जोड़ती हैं। वह जनकल्याण और गौ सेवा को अपने संकल्प का हिस्सा बताती हैं। इसके अलावा गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने की बात भी कहती हैं। यात्रा के दौरान वह लोगों से इन मुद्दों पर बातचीत करती हैं। उनके साथ चल रहे सहयोगी भी यात्रा को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराने में मदद कर रहे हैं।
पहले भी कर चुकी हैं दंडवत यात्रा
यह रेणु हरिवंशी की पहली दंडवत यात्रा नहीं है। इससे पहले वर्ष 2023 में उन्होंने 237 किलोमीटर की दंडवत यात्रा पूरी की थी। बताया गया कि उस यात्रा को पूरा करने में उन्हें करीब 67 दिन लगे थे। उस दौरान भी उन्होंने शरीर को आराम देने के लिए गद्दे का इस्तेमाल नहीं किया था। इस बार उन्होंने दूरी बढ़ाते हुए करीब 273 किलोमीटर की यात्रा का संकल्प लिया है। लगातार दंडवत करने के कारण यात्रा में काफी समय लग रहा है।
श्रीमाधोपुर में हुआ स्वागत
यात्रा के दौरान देर शाम रेणु श्रीमाधोपुर बाईपास रोड पहुंचीं। यहां श्री श्याम नवयुवक मंडल और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने उनका स्वागत किया। लोगों ने उन्हें साफा, माला और दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया। उन्हें स्मृति चिह्न भी भेंट किया गया। कुछ समय आराम करने के बाद रेणु ने दोबारा दंडवत यात्रा शुरू कर दी। उनके साथ मौजूद लोग भी यात्रा में सहयोग करते रहे।
नवरात्र के आसपास खाटूश्यामजी पहुंचने की उम्मीद
273 किलोमीटर की इस यात्रा का अंतिम पड़ाव खाटूश्यामजी है। रेणु के नवरात्र के आसपास बाबा श्याम के दरबार में पहुंचने की उम्मीद बताई जा रही है। खाटूश्यामजी पहुंचने के बाद वह सालासर की पदयात्रा करने की बात भी कह रही हैं। इससे पहले वह ब्रज चौरासी कोस की चार पैदल यात्राएं कर चुकी हैं। रेणु के लिए यह यात्रा केवल एक धार्मिक सफर नहीं, बल्कि उनके व्यक्तिगत संकल्प और आस्था से जुड़ी यात्रा है।