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भीलवाड़ा निकाय चुनाव: कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों के सिंबल अटके, पार्टी में घमासान; डोटासरा पर उठे सवाल

राजस्थान के भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों के सिंबल समय पर RO तक नहीं पहुंचने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम के 70 वार्डों में कांग्रेस 53 प्रत्याशियों के अधिकृत सिंबल ही निर्धारित समय सीमा के भीतर रिटर्निंग ऑफिसर के सामने पेश कर सकी। बाकी 17 प्रत्याशियों के अथॉरिटी लेटर समय निकलने के बाद पहुंचने के कारण निर्वाचन विभाग ने उन्हें स्वीकार नहीं किया।

घटनाक्रम के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला कांग्रेस अध्यक्ष शिवराम खटीक के नेतृत्व में देर रात करीब 10 बजे तक धरना-प्रदर्शन किया। वहीं, पार्टी के अंदर से ही प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठने के बाद मामला और गरमा गया है।

17 प्रत्याशियों के सिंबल समय पर क्यों नहीं पहुंचे?

भीलवाड़ा नगर निगम के 70 वार्डों में कांग्रेस ने प्रत्याशियों को अधिकृत किया था। लेकिन नामांकन प्रक्रिया के दौरान निर्धारित समय सीमा तक केवल 53 प्रत्याशियों के सिंबल ही RO के समक्ष जमा हो पाए।

17 प्रत्याशियों से जुड़े अथॉरिटी लेटर समय सीमा समाप्त होने के बाद पहुंचने के कारण निर्वाचन अधिकारियों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। इससे इन प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने की स्थिति पर संकट खड़ा हो गया।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस घटनाक्रम के लिए निर्वाचन व्यवस्था और भाजपा सरकार पर सवाल उठाए, लेकिन इसी बीच पार्टी के भीतर से प्रदेश नेतृत्व की जिम्मेदारी को लेकर भी आवाज उठने लगी।

PCC सदस्य मनोज पालीवाल ने डोटासरा पर लगाए आरोप

कांग्रेस PCC सदस्य और पूर्व पार्षद मनोज पालीवाल ने रोडवेज स्टैंड के सामने एक निजी होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर गंभीर आरोप लगाए।

पालीवाल ने कहा कि 17 अधिकृत प्रत्याशियों के सिंबल समय पर RO तक पहुंचाना पार्टी संगठन की जिम्मेदारी थी। उनके अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष या उनके अधिकृत प्रतिनिधि को सिंबल जमा कराने की प्रक्रिया पूरी करनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेशाध्यक्ष के प्रतिनिधि मौके पर मौजूद नहीं थे और सिंबल अलग-अलग हिस्सों में खुले पैकेट के रूप में पहुंचे। उनका दावा है कि इसी वजह से 17 प्रत्याशियों के सिंबल निर्धारित समय के भीतर RO तक नहीं पहुंच पाए।

इन आरोपों पर गोविंद सिंह डोटासरा या उनके प्रतिनिधि की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

सीलबंद पैकेट के बजाय खुले में सिंबल भेजने का आरोप

मनोज पालीवाल ने सिंबल भेजने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि 70 अधिकृत सिंबल एक सीलबंद पैकेट में भेजने के बजाय खुले रूप में भेजे गए।

उन्होंने दावा किया कि सिंबल देहात कांग्रेस से जुड़े एक कथित पदाधिकारी के माध्यम से भेजे गए थे। पालीवाल ने सवाल उठाया कि पार्टी के अधिकृत चुनाव चिन्ह किसे और किस अधिकार के तहत सौंपे गए थे?

उन्होंने यह भी पूछा कि जब सिंबल निर्धारित समय सीमा के भीतर RO के पास जमा होने थे, तो 17 प्रत्याशियों के सिंबल समय पर क्यों नहीं पहुंच पाए।

कार्यकर्ताओं ने देर रात तक किया प्रदर्शन

17 प्रत्याशियों के सिंबल स्वीकार नहीं किए जाने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली। जिला कांग्रेस अध्यक्ष शिवराम खटीक के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन देर रात करीब 10 बजे तक चला। कांग्रेस नेताओं ने इस घटनाक्रम के लिए चुनावी व्यवस्था और भाजपा सरकार पर सवाल उठाए।

हालांकि, इसी दौरान कांग्रेस के भीतर से ही संगठनात्मक स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग उठने लगी, जिससे विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया।

राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे से जांच की मांग

मनोज पालीवाल ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र भेजकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने सिंबल तैयार होने से लेकर उन्हें संबंधित प्रत्याशियों तक पहुंचाने और फिर RO के समक्ष जमा कराने तक पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है। साथ ही जिम्मेदारी तय करने और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है।

पालीवाल का कहना है कि 17 प्रत्याशियों का अधिकृत उम्मीदवार के तौर पर चुनावी प्रक्रिया से प्रभावित होना सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं माना जा सकता, क्योंकि इससे चुनाव लड़ रहे कार्यकर्ताओं के राजनीतिक भविष्य पर असर पड़ सकता है।

‘विरोध व्यक्ति से नहीं, संगठनात्मक जवाबदेही से’

पालीवाल ने अपने विरोध को किसी एक व्यक्ति के खिलाफ अभियान मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उनका मुद्दा कार्यकर्ताओं के साथ कथित भेदभाव और संगठनात्मक जवाबदेही का है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें किसी संगठनात्मक पद से हटाया भी जाता है, तो वह कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के लिए काम करते रहेंगे।

इस बयान के बाद भीलवाड़ा कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद की चर्चा और तेज हो गई है।

जयपुर की घटना से जोड़कर भी देखा जा रहा मामला

सिंबल विवाद के बीच जयपुर कांग्रेस कार्यालय में भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ नेताओं रामलाल जाट और धीरज गुर्जर के बीच कथित राजनीतिक गहमागहमी की खबरें भी चर्चा में हैं।

राजनीतिक गलियारों में इन दोनों घटनाक्रमों को जोड़कर देखा जा रहा है और टिकट वितरण को लेकर शुरू हुई नाराजगी के सिंबल विवाद तक पहुंचने की अटकलें लगाई जा रही हैं।

हालांकि, इन दोनों घटनाओं के बीच सीधे संबंध की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक चर्चाओं और अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।

भाजपा-कांग्रेस दोनों में टिकट वितरण को लेकर नाराजगी

राजस्थान के निकाय चुनावों में टिकट वितरण को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में कई जगह असंतोष की खबरें सामने आई हैं।

लेकिन भीलवाड़ा में कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों के सिंबल समय पर जमा नहीं होने का मामला पार्टी के लिए अलग चुनौती बन गया है। सवाल अब सिर्फ टिकट वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन की चुनावी तैयारी और जिम्मेदारी तय करने तक पहुंच गया है।

अब जांच से सामने आएगा असली कारण

भीलवाड़ा में कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों के सिंबल समय पर RO तक नहीं पहुंचने के मामले ने प्रदेश नेतृत्व के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 17 प्रत्याशियों के सिंबल समय सीमा के भीतर क्यों नहीं पहुंच सके? क्या यह महज प्रशासनिक या तकनीकी चूक थी, संगठनात्मक अव्यवस्था थी या इसके पीछे कोई अंदरूनी राजनीतिक खींचतान थी?

यदि कांग्रेस नेतृत्व मामले की जांच कराता है तो सिंबल वितरण से लेकर RO के सामने जमा होने तक की पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी तय हो सकती है।

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Stv News Rajasthan

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