राजस्थान निकाय चुनाव में ओवैसी की एंट्री, RLP-AIMIM गठबंधन से बदलेंगे सियासी समीकरण?
राजस्थान के निकाय चुनाव में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री ने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। ओवैसी 6 सितंबर को जयपुर के शास्त्री नगर में चुनावी सभा को संबोधित करेंगे। इस सभा में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के अध्यक्ष और सांसद हनुमान बेनीवाल भी मौजूद रहेंगे।
राजस्थान में होने वाले निकाय चुनाव से पहले RLP और AIMIM के गठबंधन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। दोनों दल जाट-मुस्लिम समीकरण के सहारे खुद को तीसरे विकल्प के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह गठबंधन बीजेपी और कांग्रेस के पारंपरिक मुकाबले को प्रभावित कर पाएगा?
6 सितंबर को जयपुर में ओवैसी- बेनीवाल की सभा
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी 6 सितंबर को शाम 6 बजे जयपुर के शास्त्री नगर में चुनावी सभा करेंगे। सभा में RLP प्रमुख हनुमान बेनीवाल भी शामिल होंगे।
दोनों नेताओं की एक मंच पर मौजूदगी को गठबंधन की चुनावी ताकत के प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। निकाय चुनाव से ठीक पहले होने वाली इस सभा के जरिए AIMIM और RLP अपने समर्थकों को लामबंद करने के साथ-साथ मतदाताओं तक गठबंधन का संदेश पहुंचाने की कोशिश करेंगे।
RLP-AIMIM साथ मिलकर लड़ रहे चुनाव
राजस्थान निकाय चुनाव में RLP और AIMIM ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। दोनों दलों के गठबंधन को राज्य की राजनीति में एक संभावित तीसरे विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।
गठबंधन की रणनीति में जाट और मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर खास जोर माना जा रहा है। यदि यह समीकरण कुछ क्षेत्रों में प्रभावी होता है तो इसका सीधा असर बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
हालांकि, वोटों का वास्तविक बंटवारा किस तरह होता है और गठबंधन कितने वार्डों में प्रभाव डाल पाता है, इसका पता चुनाव परिणाम आने के बाद ही चलेगा।
AIMIM सिर्फ 7 सीटों पर उतरेगी
AIMIM राजस्थान में सीमित सीटों पर ही चुनाव लड़ रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पार्टी 7 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।
सीमित सीटों पर चुनाव लड़ने की वजह से राज्यभर में कांग्रेस या बीजेपी के चुनावी प्रदर्शन पर व्यापक असर पड़ने की संभावना फिलहाल सीमित मानी जा रही है। हालांकि, जिन वार्डों में AIMIM और RLP के उम्मीदवार मजबूत स्थिति में होंगे, वहां मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है।
खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों में AIMIM की मौजूदगी कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है, जबकि कुछ सीटों पर बीजेपी के खिलाफ वोटों के बंटवारे का असर भी देखने को मिल सकता है।
जयपुर में BJP ने उतारे 8 मुस्लिम उम्मीदवार
राजधानी जयपुर में भी इस बार चुनावी समीकरण दिलचस्प नजर आ रहे हैं। बीजेपी ने 8 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। ये उम्मीदवार मुस्लिम बहुल वार्डों से चुनाव लड़ रहे हैं।
ऐसे में AIMIM की एंट्री के साथ जयपुर में मुस्लिम वोटों के संभावित बंटवारे को लेकर राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हुई हैं।
कांग्रेस के लिए चुनौती यह है कि AIMIM अगर मुस्लिम मतदाताओं के एक हिस्से को अपने पक्ष में खींचने में सफल होती है, तो कई वार्डों में मुकाबले का गणित बदल सकता है। वहीं बीजेपी के मुस्लिम उम्मीदवारों के प्रदर्शन का भी इन क्षेत्रों में चुनावी समीकरण पर असर पड़ सकता है।
हाईकोर्ट से AIMIM को चुनाव चिन्ह पर झटका
निकाय चुनाव से पहले AIMIM को चुनाव चिन्ह को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच से झटका लगा था। पार्टी की ओर से अपने उम्मीदवारों को आधिकारिक चुनाव चिन्ह ‘पतंग’ दिए जाने की मांग की गई थी, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया।
इसके बाद AIMIM के उम्मीदवारों के निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने की स्थिति बनी है। चुनाव चिन्ह को लेकर पार्टी के सामने आई यह चुनौती उसके चुनावी अभियान के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इसके बावजूद पार्टी ने चुनाव प्रचार जारी रखा है और अब असदुद्दीन ओवैसी खुद जयपुर में सभा करने पहुंच रहे हैं।
क्या RLP-AIMIM बिगाड़ पाएगा बीजेपी-कांग्रेस का खेल?
राजस्थान की निकाय राजनीति में अब तक बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला रहा है। ऐसे में RLP-AIMIM गठबंधन की एंट्री कुछ वार्डों में मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकती है।
अगर गठबंधन जाट और मुस्लिम मतदाताओं के बीच प्रभावी समर्थन हासिल करता है तो इसका असर खासतौर पर उन सीटों पर पड़ सकता है जहां जीत का अंतर कम रहता है।
दूसरी ओर, AIMIM के सीमित सीटों पर चुनाव लड़ने और उम्मीदवारों के निर्दलीय तौर पर मैदान में उतरने की वजह से इसका प्रभाव कितने क्षेत्रों तक सीमित रहता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
ओवैसी की सभा पर टिकी राजनीतिक नजरें
6 सितंबर की जयपुर सभा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें असदुद्दीन ओवैसी और हनुमान बेनीवाल एक साथ चुनावी मंच साझा करेंगे। दोनों दल इस सभा के जरिए गठबंधन की ताकत और अपनी राजनीतिक मौजूदगी का संदेश देने की तैयारी में हैं।
अब बड़ा सवाल यही है कि RLP-AIMIM का जाट-मुस्लिम समीकरण जमीन पर कितना असरदार साबित होता है। क्या यह गठबंधन बीजेपी-कांग्रेस के वोटों में सेंध लगाएगा या फिर सीमित सीटों तक ही इसका प्रभाव रहेगा? इसका जवाब निकाय चुनाव के नतीजे ही देंगे।