अलवर में हाईराइज सोसायटी में पहली मेगा मॉक ड्रिल, प्रशासन ने परखी आपदा तैयारियां
अलवर के अरावली विहार थाना क्षेत्र स्थित स्कीम नंबर-8 की हाईरेज रेजिडेंट सोसायटी में शुक्रवार दोपहर अचानक उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बी-905 फ्लैट में आग लगने की सूचना कंट्रोल रूम को मिली। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, नगर विकास न्यास, अग्निशमन विभाग, एंबुलेंस और रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई। जिला कलेक्टर आर्तिका शुक्ला, पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी, एएसपी दीपक शर्मा और सीओ अंगद शर्मा भी घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे ऑपरेशन की निगरानी की।
कुछ ही देर में स्पष्ट हुआ कि यह कोई वास्तविक हादसा नहीं, बल्कि जिला प्रशासन द्वारा आयोजित हाईराइज बिल्डिंग का पहला मेगा मॉक ड्रिल था। डिजास्टर मैनेजमेंट की तैयारियों को परखने के लिए नौवीं मंजिल पर आग लगने का सीन तैयार किया गया था। इससे पहले जिले में केवल एक या दो मंजिला इमारतों में ही ऐसे अभ्यास होते रहे हैं, लेकिन पहली बार इतनी ऊंची इमारत में रेस्क्यू ऑपरेशन का अभ्यास किया गया।
दोपहर 12:35 बजे सूचना मिलने के बाद विभिन्न विभागों की प्रतिक्रिया का समय रिकॉर्ड किया गया। कलेक्टर आर्तिका शुक्ला ने बताया कि कई विभाग तय समय पर मौके पर पहुंच गए, लेकिन अस्पताल की एंबुलेंस और सार्वजनिक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली अपेक्षा से धीमी रही। मलबा हटाने जैसे कार्यों में भी अधिक समय लगा, जिस पर सुधार के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस अभ्यास का उद्देश्य विभागों की वास्तविक क्षमता का आकलन कर कमियों को दूर करना है, ताकि किसी वास्तविक आपदा में जनहानि को रोका जा सके।
पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने बताया कि देश-विदेश में हाईराइज इमारतों में आग की कई बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनसे सबक लेते हुए अलवर में यह मॉक ड्रिल आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस की भूमिका सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं होती, बल्कि ट्रैफिक नियंत्रण, लोगों को सुरक्षित निकालना, परिजनों को सूचना देना और रेस्क्यू ऑपरेशन का समन्वय करना भी अहम होता है। अरावली विहार थाना पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में यह मॉक ड्रिल सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
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