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गरीबी की मार: तीन दिन तक पति के शव के पास बैठी रही पत्नी, मदद मिलने पर हुआ अंतिम संस्कार

बिहार के खगड़िया जिले से सामने आई एक घटना ने गरीबी, सामाजिक संवेदनशीलता और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आर्थिक तंगी के कारण एक महिला अपने दिवंगत पति के शव के साथ तीन दिनों तक झोपड़ी में बैठी रही, क्योंकि उसके पास अंतिम संस्कार कराने के लिए भी पैसे नहीं थे। घटना की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए फैलने के बाद स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन ने सहयोग कर अंतिम संस्कार की व्यवस्था कराई।

आर्थिक तंगी के कारण तीन दिन तक नहीं हो सका अंतिम संस्कार

जानकारी के अनुसार, खगड़िया निवासी मन्नु साह का बीमारी के चलते निधन हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के कारण उनकी पत्नी अंतिम संस्कार का खर्च जुटाने में असमर्थ रही। नतीजतन शव तीन दिनों तक घर में ही पड़ा रहा और महिला वहीं बैठकर मदद का इंतजार करती रही। आसपास के लोगों को भी घटना की जानकारी तब हुई, जब शव से दुर्गंध आने लगी। इसके बाद मामला तेजी से लोगों तक पहुंचा और सहायता के प्रयास शुरू हुए।

सामाजिक सहयोग और प्रशासन की पहल से मिली राहत

घटना सार्वजनिक होने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और नगर प्रशासन सक्रिय हुए। वार्ड पार्षद सहित कई लोगों ने आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई, जिसके बाद अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था की गई। प्रशासन ने आवश्यक सहयोग देकर परिवार को राहत पहुंचाई। इस घटना ने यह भी दिखाया कि समय पर सूचना मिलने पर सामूहिक प्रयास किसी जरूरतमंद परिवार के लिए बड़ी मदद साबित हो सकते हैं।

बीमारी और गरीबी ने परिवार को तोड़ दिया

मृतक मन्नु साह दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। कुछ समय पहले उन्हें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो गई। सीमित आय और आर्थिक अभाव के कारण उनका समुचित इलाज नहीं हो सका। इलाज के दौरान परिवार की बची-खुची जमा पूंजी भी खत्म हो गई। बीमारी के बाद उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि अंतिम संस्कार तक कराना संभव नहीं हो पाया।

परिवार की बेबसी ने खड़े किए कई सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार मृतक का बेटा दूसरे राज्य में मजदूरी करता है, लेकिन परिवार के पास उससे तत्काल संपर्क करने का कोई साधन नहीं था। महिला अकेले ही इस कठिन परिस्थिति का सामना करती रही। यह घटना केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि उन गरीब परिवारों की स्थिति को भी सामने लाती है जो संकट की घड़ी में आर्थिक और सामाजिक सहयोग के अभाव से जूझते हैं। इस मामले ने जरूरतमंद लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाने और सामाजिक संवेदनशीलता बढ़ाने की आवश्यकता को फिर से रेखांकित किया।

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Stv News Rajasthan

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