आसाराम की अंतरिम जमानत पर फैसला फिलहाल टला, सुप्रीम कोर्ट ने AIIMS मेडिकल बोर्ड से मांगी रिपोर्ट
जोधपुर दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने AIIMS के निदेशक को विशेष मेडिकल बोर्ड गठित कर एक सप्ताह के भीतर स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अब आगे की सुनवाई और अंतरिम जमानत पर फैसला मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड गठित करने का दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के निदेशक को एक विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया। जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस पी. बी. वराले की पीठ ने कहा कि बोर्ड आसाराम के स्वास्थ्य की विस्तृत जांच कर एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत पर कोई निर्णय स्वास्थ्य रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद ही लिया जाएगा।
मेडिकल आधार पर मांगी गई है अंतरिम जमानत
आसाराम की ओर से दायर याचिका में खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए इलाज के लिए अंतरिम जमानत की मांग की गई है। इससे पहले सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से मेडिकल रिपोर्ट की समीक्षा कर यह बताने को कहा था कि क्या उनकी स्वास्थ्य स्थिति वास्तव में इतनी गंभीर है कि उन्हें उपचार के लिए अस्थायी राहत दी जा सके। अदालत ने यह भी कहा था कि यदि मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर बीमारी की पुष्टि होती है तो वह चिकित्सा के उद्देश्य से सीमित अवधि की अंतरिम जमानत पर विचार कर सकती है।
राजस्थान सरकार ने स्वास्थ्य स्थिति पर रखा अपना पक्ष
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति फिलहाल स्थिर है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ महीने पहले आसाराम अयोध्या और काशी विश्वनाथ की यात्रा पर गए थे, जहां उन्होंने पैदल चलकर दर्शन किए थे। सरकार का पक्ष है कि मेडिकल तथ्यों के आधार पर ही किसी भी प्रकार की राहत पर विचार किया जाना चाहिए। अब अदालत AIIMS मेडिकल बोर्ड की स्वतंत्र रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
2013 के दुष्कर्म मामले में काट रहे हैं आजीवन कारावास
आसाराम को वर्ष 2013 में जोधपुर स्थित आश्रम में एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद वर्ष 2018 में विशेष अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले को उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी, जहां अपील पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में दायर अंतरिम जमानत याचिका पर फिलहाल अंतिम निर्णय मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा।
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