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फर्जी डिग्री मामले में मेवाड़ यूनिवर्सिटी का पूर्व डिप्टी एग्जाम कंट्रोलर गिरफ्तार, 15 आरोपी सलाखों के पीछे

फर्जी डिग्री केस में मेवाड़ यूनिवर्सिटी का पूर्व अधिकारी गिरफ्तार

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की स्कूल व्याख्याता (हिंदी) भर्ती परीक्षा-2022 में फर्जी डिग्री के इस्तेमाल से जुड़े मामले में एसओजी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मेवाड़ यूनिवर्सिटी के पूर्व डिप्टी एग्जाम कंट्रोलर को गिरफ्तार किया है। जांच में अब तक 15 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और फर्जी डिग्री रैकेट की परतें लगातार खुल रही हैं।

कोर्ट में सरेंडर के बाद SOG ने किया गिरफ्तार

राजस्थान लोक सेवा आयोग की हिंदी स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़े फर्जी डिग्री मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार के तत्कालीन डिप्टी एग्जाम कंट्रोलर सुशील कुमार शर्मा को गिरफ्तार किया है। आरोपी उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ का रहने वाला है। अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद उसने अदालत में आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद एसओजी ने न्यायालय की अनुमति से उसे हिरासत में लेकर औपचारिक गिरफ्तारी की।

दस्तावेज सत्यापन में खुला फर्जी डिग्री का राज

यह मामला वर्ष 2022 में आयोजित आरपीएससी स्कूल व्याख्याता (हिंदी) भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन के दौरान मेवाड़ यूनिवर्सिटी से जारी दो एमए डिग्रियों पर संदेह हुआ। जांच में दोनों डिग्रियां फर्जी पाई गईं। इसके बाद आरपीएससी की शिकायत पर अजमेर के सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज हुआ और जांच एसओजी को सौंप दी गई। इसी जांच के दौरान फर्जी डिग्री नेटवर्क का खुलासा हुआ।

बैकडेट में तैयार की गई थीं फर्जी डिग्रियां

एसओजी की जांच में सामने आया कि यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ पूर्व अधिकारियों और बिचौलियों ने कथित रूप से मिलीभगत कर अभ्यर्थियों को बैकडेट में फर्जी डिग्रियां और अंकतालिकाएं उपलब्ध कराईं। इन दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का प्रयास किया गया। जांच एजेंसी अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े का दायरा कितना बड़ा है।

15 गिरफ्तारी के बाद भी जांच जारी

सुशील कुमार शर्मा की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में अब तक 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एसओजी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि इस रैकेट में शामिल अन्य लोगों, बिचौलियों और फर्जी डिग्री का इस्तेमाल करने वाले अभ्यर्थियों की पहचान की जा सके। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

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