‘चलो संसद’ मार्च के लिए मुंबई से दिल्ली पहुंचे युवा, बोले- अब चुप नहीं बैठेंगे
दिल्ली में आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च में शामिल होने के लिए मुंबई समेत देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में युवा राजधानी पहुंचे। कई युवाओं ने बिना आरक्षण के लंबा रेल सफर तय किया, जबकि कुछ परिवार की चिंता और विरोध के बावजूद प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध, जवाबदेही की मांग और अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।
मुश्किल सफर के बावजूद दिल्ली पहुंची युवाओं की टोली
‘चलो संसद’ मार्च में भाग लेने के लिए कई युवाओं ने लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा की। किसी ने सामान्य श्रेणी के डिब्बे में सफर किया तो किसी ने बिना पक्के टिकट के राजधानी का रुख किया। कई प्रतिभागियों ने बताया कि यह केवल एक प्रदर्शन में शामिल होने की यात्रा नहीं थी, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने का प्रयास भी था। युवाओं का कहना है कि देश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी आवाज दर्ज कराना हर जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है।
परिवार की चिंता के बावजूद लिया प्रदर्शन में शामिल होने का फैसला
प्रदर्शन में पहुंचे कई युवाओं ने बताया कि परिवार को मनाना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। कुछ ने माता-पिता को समझाकर अनुमति ली, जबकि कुछ बिना बताए ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए। उनका कहना है कि परिवार की चिंता अपनी जगह है, लेकिन लोकतांत्रिक अधिकारों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर अपनी भागीदारी भी जरूरी है। युवाओं के मुताबिक, वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और व्यवस्था से जवाबदेही की मांग करने के उद्देश्य से राजधानी पहुंचे हैं।
सोशल मीडिया से सड़क तक पहुंची आवाज
मुंबई के अंतिम वर्ष के कानून के छात्र बुधिराज तोराने ने बताया कि सोशल मीडिया पर चल रही बहस और कुछ पोस्ट देखने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि केवल ऑनलाइन प्रतिक्रिया देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने तय किया कि यदि किसी मुद्दे पर अपनी बात रखनी है तो लोकतांत्रिक तरीके से मैदान में उतरकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध किसी भी लोकतंत्र की महत्वपूर्ण पहचान है और नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए।
आंदोलन का दायरा कई मुद्दों तक पहुंचा
प्रदर्शन से जुड़े प्रतिभागियों का कहना है कि यह अभियान शुरुआत में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध से जुड़ा था, लेकिन समय के साथ इसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और अन्य सार्वजनिक मुद्दे भी शामिल होते गए। हाल के घटनाक्रमों के बाद कई युवाओं ने आंदोलन से जुड़ने का निर्णय लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपनी मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से सामने रखना चाहते हैं और चाहते हैं कि संबंधित मुद्दों पर उचित संवाद और जवाबदेही सुनिश्चित हो।
लोकतंत्र में भागीदारी को युवाओं ने बताया जिम्मेदारी
मुंबई से दिल्ली तक का यह सफर केवल सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करने भर का नहीं था, बल्कि लोकतांत्रिक भागीदारी के प्रति युवाओं की सोच को भी दर्शाता है। प्रदर्शन में शामिल युवाओं का कहना है कि किसी भी लोकतंत्र में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी, शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखने की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण होती है। उनका मानना है कि जनहित के मुद्दों पर संवाद और संवैधानिक तरीके से आवाज उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाता है।