कानपुर में CSAM बेचने के आरोप में युवक गिरफ्तार, Google Alert से हुआ खुलासा
कानपुर में बच्चों से जुड़े यौन शोषण सामग्री (CSAM) की ऑनलाइन बिक्री के आरोप में साइबर पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, राष्ट्रीय लापता एवं शोषित बाल केंद्र (NCMEC) के पोर्टल पर Google Alert के माध्यम से सूचना मिलने के बाद जांच शुरू की गई। आरोप है कि युवक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए आपत्तिजनक सामग्री बेच रहा था। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
Google Alert के बाद शुरू हुई जांच
पुलिस के अनुसार, NCMEC पोर्टल पर Google की ओर से एक अलर्ट प्राप्त हुआ, जिसमें एक मोबाइल नंबर से बच्चों से जुड़े यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा और बेचने की आशंका जताई गई थी। सूचना मिलते ही साइबर सेल ने संबंधित मोबाइल नंबर और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की।
मोबाइल ट्रैकिंग के जरिए आरोपी तक पहुंची पुलिस
जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल नंबर और IMEI की मदद से आरोपी की लोकेशन का पता लगाया। इसके बाद जाजमऊ क्षेत्र के लारी कंपाउंड स्थित शिवांशी टेनरी इलाके से मोहम्मद नोमान नामक युवक को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान उसके पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए। पुलिस का कहना है कि जब्त किए गए उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
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ऑनलाइन सामग्री बेचने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी पर आरोप है कि वह इंटरनेट से बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री हासिल कर उसे टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से पैसों के बदले साझा करता था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या किसी बड़े ऑनलाइन नेटवर्क का हिस्सा था।
डिजिटल साक्ष्यों की हो रही फोरेंसिक जांच
साइबर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित रूप से सामग्री कितने लोगों तक पहुंचाई गई और इस मामले में अन्य लोगों की भूमिका रही या नहीं।
बच्चों से जुड़े ऑनलाइन अपराधों पर बढ़ी निगरानी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के यौन शोषण से संबंधित ऑनलाइन सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए तकनीकी निगरानी लगातार बढ़ाई जा रही है। ऐसे मामलों में सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाती है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाती है। अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की है कि यदि उन्हें इस प्रकार की कोई संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि दिखाई दे तो तत्काल संबंधित एजेंसियों को इसकी सूचना दें।
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