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सीकर में आटा-साटा प्रथा का खुलासा, 42 साल के विधुर से नाबालिग लड़की की शादी की तैयारी; 5 बाल विवाह रुकवाए

सीकर में 5 बाल विवाह रोके, 42 साल के व्यक्ति से तय थी शादी

राजस्थान के सीकर जिले में बाल विवाह रोकने की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। गोकुलपुरा थाना क्षेत्र के एक गांव में आटा-साटा प्रथा के तहत तीन नाबालिग लड़कियों और दो नाबालिग लड़कों की शादी कराने की तैयारी चल रही थी। इनमें एक 12वीं पास नाबालिग लड़की का विवाह 42 वर्षीय विधुर से तय किया गया था। सूचना मिलने पर पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और सामाजिक संस्था की संयुक्त कार्रवाई से न्यायालय के आदेश पर पांचों बाल विवाह समय रहते रुकवा दिए गए।

आटा-साटा प्रथा के नाम पर हो रही थी नाबालिगों की शादी

सीकर जिले के गोकुलपुरा थाना क्षेत्र के एक गांव में नाबालिगों की शादी की सूचना मिलने के बाद प्रशासन हरकत में आया। जांच में सामने आया कि परिवार आटा-साटा प्रथा के तहत पांच बच्चों के विवाह की तैयारी कर रहा था। इसमें तीन नाबालिग लड़कियां और दो नाबालिग लड़के शामिल थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि एक नाबालिग लड़की की शादी उससे करीब 30 साल बड़े 42 वर्षीय विधुर व्यक्ति से तय की गई थी। यह रिश्ता कथित तौर पर पारिवारिक लेन-देन की परंपरा के तहत तय किया गया था।

बदले में चाचा के बेटों की शादी कराने की थी योजना

जांच में सामने आया कि नाबालिग लड़की की शादी 42 वर्षीय विधुर से इसलिए तय की गई थी ताकि बदले में उसके चाचा के दो नाबालिग बेटों की शादी भी कराई जा सके। दोनों लड़कों की उम्र महज 9 और 12 वर्ष बताई गई है। परिवार द्वारा आटा-साटा प्रथा के तहत रिश्तों का यह लेन-देन किया जा रहा था। प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की पड़ताल की और कानूनी प्रक्रिया के तहत विवाह रोकने की कार्रवाई शुरू की।

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दस्तावेज छिपाने की कोशिश, स्कूल रिकॉर्ड से खुला सच

जब टीम गांव पहुंची तो परिवार ने शुरुआत में मामले को छिपाने का प्रयास किया। परिजनों ने दावा किया कि शादी बालिग लड़की की है, लेकिन उम्र से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बाद अधिकारियों ने संबंधित सरकारी स्कूल से रिकॉर्ड और दसवीं की अंकतालिका की जांच कराई। दस्तावेजों से पुष्टि हुई कि लड़की अभी 18 वर्ष से कम उम्र की है। इसके बाद पूरी आटा-साटा विवाह योजना का खुलासा हुआ।

न्यायालय के आदेश से पांच घंटे में रुके बाल विवाह

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम ने तत्काल कार्रवाई की। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रूपा गुप्ता के निर्देशन में सचिव शालिनी गोयल ने टीमों को गांव भेजा। इसके बाद अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट शुभांगिनी चौहान ने बाल विवाह निषेध अधिनियम की धारा 13(1) के तहत निषेधाज्ञा जारी की। न्यायालय के आदेश के बाद करीब पांच घंटे के भीतर पांचों नाबालिगों के विवाह रुकवा दिए गए।

नाबालिगों ने बताई अपनी पढ़ाई जारी रखने की इच्छा

कार्रवाई के दौरान नाबालिग छात्रा ने अधिकारियों को बताया कि उसने 12वीं कक्षा पास कर ली है और वह आगे पढ़ाई करना चाहती है। वहीं 12 वर्षीय बालक ने भी अपनी इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि वह भविष्य में वकील बनना चाहता है। उसने चिंता जताई कि कम उम्र में शादी होने से उसकी पढ़ाई अधूरी रह सकती है। बच्चों की बातों से टीम को यह भी पता चला कि वे शिक्षा जारी रखना चाहते हैं।

संयुक्त टीम ने की कार्रवाई

बाल विवाह रोकने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गोकुलपुरा थाना पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन और गायत्री सेवा संस्थान की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। टीम ने मौके पर पहुंचकर परिवार को कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी और विवाह की प्रक्रिया को रुकवाया। अधिकारियों ने बताया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए ऐसी सूचनाओं पर तुरंत कार्रवाई की जाती है।

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