जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारी युवाओं के नाम शशि थरूर का खुला पत्र, बोले- पेपर लीक सबसे बड़ा अन्याय
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं के नाम एक खुला पत्र जारी करते हुए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और मेरिट आधारित व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवारों के युवाओं के सपनों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाती हैं। साथ ही थरूर ने केंद्र सरकार से संवाद शुरू करने और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से आमरण अनशन समाप्त करने की अपील भी की।
‘मैं नेता नहीं, एक चिंतित नागरिक के रूप में लिख रहा हूं’
अपने खुले पत्र में शशि थरूर ने कहा कि वह युवाओं से किसी राजनेता या सांसद के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे भारतीय के रूप में बात कर रहे हैं जिसे देश के युवाओं का भविष्य चिंतित करता है। उन्होंने कहा कि आज लाखों छात्र निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की उम्मीद लेकर मेहनत करते हैं। ऐसे में यदि परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं तो इसका असर केवल परिणामों पर नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास और भविष्य पर भी पड़ता है।
मध्यम वर्गीय परिवार से लेकर सफलता तक का सफर किया साझा
थरूर ने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि उनका पालन-पोषण एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ, जहां उनके पिता नौकरी करते थे और परिवार की आय सीमित थी। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति, निष्पक्ष परीक्षाएं और योग्यता आधारित चयन ही उनके जैसे परिवारों के लिए आगे बढ़ने का माध्यम थे। उन्होंने अपनी शिक्षा और करियर का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां मेहनत और अवसरों की निष्पक्षता का परिणाम थीं, किसी विशेष सुविधा का नहीं।
‘पेपर लीक से सबसे ज्यादा नुकसान मेहनत करने वाले छात्रों को’
कांग्रेस सांसद ने कहा कि जब प्रश्नपत्र लीक होते हैं, परीक्षाएं रद्द होती हैं या चयन प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर पड़ता है, तो इसका सबसे अधिक नुकसान उन छात्रों को होता है जो सीमित संसाधनों के बावजूद कड़ी मेहनत करते हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों के पास वैकल्पिक अवसर हो सकते हैं, लेकिन साधारण परिवारों के युवाओं के लिए निष्पक्ष परीक्षा ही आगे बढ़ने का सबसे बड़ा माध्यम होती है। इसलिए ऐसी घटनाएं केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के सपनों के साथ विश्वासघात हैं।
सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील
थरूर ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से भी आग्रह किया कि वे अपना आमरण अनशन समाप्त करें। उन्होंने कहा कि वांगचुक ने अपने आंदोलन के माध्यम से देश का ध्यान महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर आकर्षित किया है और अब उनकी आवाज आगे की लड़ाई के लिए भी जरूरी है। थरूर का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और संस्थागत प्रक्रिया के माध्यम से समाधान तलाशना अधिक प्रभावी होगा।
केंद्र सरकार से संवाद की अपील, संसद में मुद्दा उठाने का भरोसा
अपने पत्र के अंत में शशि थरूर ने केंद्र सरकार से युवाओं के साथ संवाद शुरू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद का आगामी सत्र छात्रों के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का महत्वपूर्ण अवसर होगा। उनके अनुसार लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि सरकार युवाओं की चिंताओं को सुने और समाधान की दिशा में सार्थक पहल करे। थरूर ने उम्मीद जताई कि छात्रों के मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा और ठोस कदम उठाए जाएंगे।