सांवलिया सेठ का मासिक भंडार खुला, पहले चरण में 10.11 करोड़ रुपये की गिनती पूरी
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर में मासिक दानपेटी (भंडार) खोले जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पहले चरण की गिनती में ही 10 करोड़ 11 लाख 83 हजार रुपये की नकद राशि सामने आई है। हालांकि यह केवल शुरुआती आंकड़ा है। अभी सोना-चांदी के आभूषणों और विदेशी मुद्रा की गणना बाकी है, जिसके बाद कुल चढ़ावे की आधिकारिक राशि घोषित की जाएगी।
भोग आरती के बाद शुरू हुई दानपेटी की गिनती
कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और ठाकुरजी की भोग आरती संपन्न होने के बाद मासिक भंडार खोला गया। सुरक्षा व्यवस्था के बीच दानपेटियों को खोला गया और निर्धारित प्रक्रिया के तहत चढ़ावे की गणना शुरू हुई। मंदिर परिसर में पूरे समय प्रशासन और मंदिर मंडल के अधिकारी मौजूद रहे।
पहले चरण में 10 करोड़ से अधिक नकद राशि
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, पहले चरण में नोटों की गिनती पूरी हो चुकी है, जिसमें 10 करोड़ 11 लाख 83 हजार रुपये की नकद राशि दर्ज की गई है। यह केवल नोटों की गिनती का आंकड़ा है। चढ़ावे में प्राप्त अन्य मूल्यवान वस्तुओं की गणना अभी शेष है, इसलिए कुल दानराशि में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।
150 से अधिक कर्मचारी गिनती में जुटे
दानराशि की पारदर्शी और व्यवस्थित गणना के लिए मंदिर प्रशासन ने 150 से अधिक बैंक कर्मचारियों और मंदिर कार्मिकों की टीम तैनात की है। नोटों की छंटाई, मूल्यवर्ग के अनुसार बंडल तैयार करने और मशीनों के माध्यम से गिनती का कार्य लगातार जारी है। पूरी प्रक्रिया सुरक्षा और निगरानी के बीच संपन्न कराई जा रही है।
सोना-चांदी और विदेशी मुद्रा की गिनती अभी बाकी
मंदिर प्रबंधन ने बताया कि फिलहाल केवल नकद राशि की प्रारंभिक गिनती पूरी हुई है। दानपेटियों से निकले सोने-चांदी के आभूषणों का वजन, उनका मूल्यांकन और विदेशी मुद्राओं की गणना आगामी चरणों में की जाएगी। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इस महीने के कुल चढ़ावे का अंतिम आधिकारिक आंकड़ा जारी किया जाएगा।
व्यापार के ‘साझीदार’ माने जाते हैं सांवलिया सेठ
देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच मान्यता है कि श्री सांवलिया सेठ की कृपा से व्यापार और कारोबार में उन्नति होती है। यही कारण है कि कई व्यापारी अपनी आय या मुनाफे का एक हिस्सा मंदिर में श्रद्धापूर्वक अर्पित करते हैं। बड़ी संख्या में एनआरआई श्रद्धालु भी यहां दर्शन कर दान चढ़ाते हैं, जिससे हर माह मंदिर के भंडार में करोड़ों रुपये का चढ़ावा एकत्र होता है।