होर्मुज टोल विवाद से बढ़ा तनाव, सऊदी अरब-ईरान आमने-सामने
होर्मुज स्ट्रेट में संभावित “टोल सिस्टम” को लेकर खाड़ी देशों के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) में जलमार्ग के भविष्य के प्रबंधन को लेकर प्रावधान सामने आने के बाद सऊदी अरब ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। सऊदी नेतृत्व का कहना है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए।
टोल व्यवस्था पर सऊदी अरब की आपत्ति
सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने होर्मुज स्ट्रेट में संभावित शुल्क व्यवस्था पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह जलमार्ग ऐतिहासिक रूप से बिना किसी बाधा के व्यापार और ऊर्जा परिवहन के लिए खुला रहा है। ऐसे में किसी भी नए शुल्क या टोल सिस्टम की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है।
ईरान के प्रस्ताव पर बढ़ी नाराजगी
रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में हुए अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन में यह संकेत दिया गया है कि शुरुआती 60 दिनों तक जलमार्ग से जहाजों को मुफ्त आवाजाही दी जाएगी, जिसके बाद सेवा शुल्क या टोल जैसी व्यवस्था लागू की जा सकती है। इसी प्रावधान को लेकर क्षेत्रीय देशों में असहमति सामने आई है।
ईरान का रुख और जलमार्ग पर दावा
ईरान का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट उसके नियंत्रण क्षेत्र में आता है और इसके संचालन में उसका महत्वपूर्ण अधिकार है। ईरानी पक्ष ने संकेत दिया है कि जलमार्ग के प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े खर्चों के लिए भविष्य में शुल्क व्यवस्था लागू की जा सकती है। साथ ही, कुछ बाहरी समुद्री मिशनों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम मार्ग
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से की ऊर्जा आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरती है। ऐसे में किसी भी तरह का शुल्क या प्रतिबंध वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर सीधा प्रभाव डाल सकता है।
राजनयिक स्तर पर बढ़ी चर्चा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर सऊदी अरब, ईरान और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के बीच बातचीत आगे भी जारी रह सकती है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित टोल सिस्टम को अंतिम रूप दिया जाएगा या नहीं।