NATO में बढ़ा तनाव, अमेरिका की रणनीति पर छिड़ी बहस
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच नाटो गठबंधन और अमेरिका के रिश्तों में तनाव बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के हालिया बयानों और यूरोप में अमेरिकी सैन्य तैनाती की समीक्षा के फैसले ने NATO के भीतर नई बहस छेड़ दी है। इस घटनाक्रम को पश्चिमी सुरक्षा ढांचे के भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है।
यूरोप में अमेरिकी सेना की तैनाती पर पुनर्विचार
ब्रसेल्स में नाटो बैठक के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने संकेत दिया कि यूरोप में अमेरिकी सैन्य बलों की स्थिति की 6 महीने की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका यह आकलन करेगा कि यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा जिम्मेदारियों को कितनी तेजी से स्वयं संभाल रहे हैं। इस समीक्षा के बाद यूरोप में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति में बदलाव संभव है।
यूरोपीय सहयोगियों पर तीखी टिप्पणी
हेगसेथ ने नाटो सहयोगियों पर आरोप लगाया कि वे सुरक्षा सहयोग के कुछ मामलों में अपेक्षित समर्थन नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा और परिचालन सुविधा से जुड़े मुद्दों पर भी सहयोग में कमी देखी गई है। इसके साथ ही उन्होंने यूरोपीय नीतियों की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए, जिनमें रक्षा बजट और सामाजिक नीतियों पर खर्च को लेकर असंतुलन का आरोप शामिल है।
नाटो के भीतर बढ़ती असहमति
हाल के वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण नाटो देशों ने रक्षा खर्च बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। नाटो महासचिव के अनुसार, सदस्य देशों ने पिछले वर्ष रक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है। इसके बावजूद अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों के बीच रणनीतिक जिम्मेदारियों को लेकर मतभेद सामने आए हैं।
रूस की गतिविधियों के बीच बढ़ी चिंता
इस पूरे घटनाक्रम के बीच रूस की सैन्य गतिविधियों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस ने नाटो सीमा के पास अपने सैन्य ठिकानों को मजबूत किया है और बेलारूस के साथ संयुक्त अभ्यास भी किए हैं। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और अधिक संवेदनशील मानी जा रही है।
अमेरिका की नई रणनीति पर चर्चा
अमेरिकी पक्ष ने संकेत दिया है कि वह नाटो को अधिक “यूरोपीय नेतृत्व” की दिशा में देखना चाहता है। प्रस्तावित बदलावों को कभी-कभी “नाटो 3.0” जैसे शब्दों से भी जोड़ा जा रहा है, जिसका उद्देश्य गठबंधन को अधिक आत्मनिर्भर बनाना बताया जा रहा है।
सुरक्षा ढांचे के भविष्य पर सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका अपनी सैन्य भागीदारी में बदलाव करता है तो इसका प्रभाव यूरोपीय सुरक्षा ढांचे पर पड़ सकता है। हालांकि, अभी किसी अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं हुई है और बातचीत जारी है।