जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर फिलहाल नहीं चलेगा बुलडोजर, कोर्ट ने रोक रखी बरकरार
उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय को बड़ी कानूनी राहत मिली है। विश्वविद्यालय के 38 भवनों को गिराने के आदेश पर कमिश्नर कोर्ट ने अंतरिम रोक जारी रखने का फैसला किया है। सोमवार को मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर कोर्ट में करीब दो घंटे तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक अपील पर अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जाएगी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी।
कमिश्नर कोर्ट में हुई करीब दो घंटे तक सुनवाई
जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े इस मामले में सोमवार को मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की ओर से अपनी-अपनी दलीलें रखी गईं। विश्वविद्यालय की तरफ से अधिवक्ता जुनैद एजाज ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद अदालत ने फिलहाल कोई नया आदेश जारी नहीं किया और पहले से लागू अंतरिम रोक को आगे भी जारी रखने का फैसला लिया।
ध्वस्तीकरण आदेश को दी गई है चुनौती
जौहर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) और जिलाधिकारी की ओर से जारी 38 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश को चुनौती दी है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने 20 जुलाई को कमिश्नर कोर्ट में अपील दाखिल की थी। अपील में ध्वस्तीकरण आदेश को गलत बताते हुए उस पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
पहले भी मिल चुकी थी अंतरिम राहत
इससे पहले 27 जुलाई को हुई सुनवाई में कमिश्नर कोर्ट ने रामपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और जिलाधिकारी द्वारा जारी ध्वस्तीकरण आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। उस समय अगली सुनवाई के लिए 3 अगस्त की तारीख तय की गई थी। सोमवार को हुई सुनवाई में अदालत ने इस रोक को बरकरार रखने का निर्णय लिया।
सुनवाई की तारीख में हुआ था बदलाव
विश्वविद्यालय के अधिवक्ता के अनुसार, मुरादाबाद में एक अधिवक्ता के निधन के कारण 28 जुलाई को न्यायिक कार्य स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद विश्वविद्यालय की ओर से जल्द सुनवाई के लिए आवेदन दिया गया। इसी आवेदन पर सुनवाई करते हुए अदालत ने ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया था।
10 अगस्त की सुनवाई पर टिकी नजरें
फिलहाल अदालत के आदेश के बाद जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर बुलडोजर कार्रवाई नहीं होगी। अब सभी पक्षों की नजर 10 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर है। माना जा रहा है कि इस सुनवाई के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और दिशा स्पष्ट हो सकती है।