नॉर्वे में पीएम मोदी पर बने कार्टून से विवाद, पश्चिमी मीडिया की मानसिकता पर उठे बड़े सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान एक विवादास्पद कार्टून को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ गई है। नॉर्वे के एक प्रमुख अखबार द्वारा प्रकाशित इस कार्टून को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है, जहां इसे भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला और नस्लवादी मानसिकता का प्रतीक बताया जा रहा है।
कार्टून को लेकर विवाद की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान एक प्रमुख नॉर्वेजियन अखबार में प्रकाशित कार्टून ने विवाद को जन्म दिया। इस कार्टून में पीएम मोदी को एक सपेरे के रूप में दर्शाया गया, जिसमें सांप की जगह पेट्रोल पंप का नोजल और पाइप दिखाया गया है। यह कार्टून 16 मई को एक ओपिनियन लेख के साथ प्रकाशित हुआ, जिसकी हेडलाइन थी—‘एक चतुर लेकिन परेशान करने वाला व्यक्ति’। इस चित्र के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और इसे आपत्तिजनक बताया गया।
रूसी तेल खरीद पर टिप्पणी से जुड़ा मामला
कार्टून के माध्यम से भारत द्वारा रूस से तेल खरीद को लेकर व्यंग्य किया गया है। पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बीच भारत की ऊर्जा नीति को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। इसी संदर्भ में इस कार्टून को एक राजनीतिक टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इस तरह की प्रस्तुति तथ्यात्मक बहस के बजाय सांस्कृतिक और नस्लीय प्रतीकों का सहारा लेकर की गई है, जो गंभीर कूटनीतिक विमर्श को कमजोर करती है।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
कार्टून के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में यूजर्स ने इसे नस्लवादी और औपनिवेशिक मानसिकता का उदाहरण बताया। लोगों का कहना है कि भारतीयों को ‘सपेरा’ जैसी पुरानी छवि में दिखाना न केवल अपमानजनक है, बल्कि यह एक देश की आधुनिक पहचान को भी कमतर करने की कोशिश है। कई यूजर्स ने पश्चिमी मीडिया पर भारत की छवि को नकारात्मक रूप में पेश करने का आरोप लगाया।
प्रेस फ्रीडम विवाद के बीच बढ़ा तनाव
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पीएम मोदी की यात्रा के दौरान प्रेस स्वतंत्रता को लेकर भी बहस चल रही है। एक नॉर्वेजियन पत्रकार के साथ हुई बातचीत को लेकर पहले ही चर्चा गर्म थी। ऐसे माहौल में इस कार्टून का सामने आना दोनों देशों के बीच संवाद और मीडिया की भूमिका को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम कूटनीतिक संवेदनशीलता की मांग करता है।
पुरानी छवियों पर फिर बहस तेज
भारत को लेकर पश्चिमी मीडिया में पुराने स्टीरियोटाइप के इस्तेमाल का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इससे पहले भी कई मौकों पर इस तरह की छवियों पर आपत्ति जताई जाती रही है। प्रधानमंत्री मोदी खुद 2014 में अमेरिका यात्रा के दौरान इस तरह की धारणाओं को बदलने की बात कह चुके हैं। मौजूदा विवाद ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि वैश्विक मीडिया को बदलते भारत को किस नजरिए से प्रस्तुत करना चाहिए।