गैस सिलेंडर महंगाई पर सियासी वार: “गरीब पर बढ़ा बोझ”, टीकाराम जूली का सरकार पर हमला
राजस्थान के अलवर में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी को आम जनता और खासकर गरीब वर्ग के लिए बड़ा आर्थिक झटका बताया। साथ ही, बाजार में कमर्शियल सिलेंडर की कमी का मुद्दा उठाते हुए सरकार के दावों पर सवाल खड़े किए।
घरेलू गैस महंगी, आम आदमी पर सीधा असर
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार एक ओर गैस की पर्याप्त उपलब्धता का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में 60 रुपए तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। उन्होंने इसे आम आदमी की जेब पर सीधा प्रहार बताया। जूली के अनुसार, पहले से ही महंगाई से जूझ रहे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए यह बढ़ोतरी अतिरिक्त बोझ बनकर सामने आई है। उन्होंने कहा कि रसोई गैस जैसी बुनियादी जरूरत की वस्तु महंगी होने से घरों का बजट पूरी तरह बिगड़ रहा है।
कमर्शियल सिलेंडर महंगा, कारोबारियों की बढ़ी मुश्किलें
जूली ने कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 125 से 150 रुपए तक की बढ़ोतरी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर होटल, ढाबा और छोटे-बड़े व्यापारियों पर पड़ रहा है। गैस महंगी होने से कारोबार की लागत बढ़ गई है, जिससे मुनाफा कम हो रहा है और कई छोटे व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस बढ़ोतरी का असर अंततः ग्राहकों पर पड़ता है, क्योंकि व्यापारी कीमतें बढ़ाने को मजबूर हो जाते हैं।
बाजार में कमी के दावे पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार भले ही गैस की कमी न होने की बात कह रही हो, लेकिन हकीकत में बाजार में कमर्शियल सिलेंडर आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कई व्यापारियों को समय पर गैस नहीं मिल पा रही, जिससे उनका काम प्रभावित हो रहा है। इस स्थिति को लेकर उन्होंने सरकार की नीतियों और सप्लाई मैनेजमेंट पर सवाल उठाए और इसे प्रशासनिक विफलता करार दिया।
“गरीबों की अनदेखी, महंगाई से बढ़ी परेशानी”
टीकाराम जूली ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि आम जनता और खासकर गरीब वर्ग के हितों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है और गैस सिलेंडर की कीमतों में इजाफा इस संकट को और गहरा कर रहा है। उनके मुताबिक, सरकार को राहत देने के बजाय जनता पर आर्थिक दबाव बढ़ाने वाले फैसले ले रही है।
चुनावी राजनीति पर भी साधा निशाना
जूली ने बयान में यह भी कहा कि यदि देश के चार राज्यों में चुनाव नहीं होते, तो पेट्रोल और डीजल के दाम भी बढ़ा दिए जाते। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनावों को देखते हुए कीमतों को नियंत्रित रखती है और बाद में आम जनता पर बोझ डालती है। इस बयान के जरिए उन्होंने महंगाई को राजनीतिक फैसलों से जोड़ते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।